बलिया। पियवा गइलन कलकतवा ए सजनी, पिया मोर मत जा हो पूरूबवा... जैसे भिखारी ठाकुर के गीतों को गाकर बृहस्पतिवार को संकल्प के रंगकर्मियों ने लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। कलेक्ट्रेट स्थित ड्रामा हाॅल में संकल्प के रंगकर्मियों ने उनके गीतों की प्रस्तुति दी।
संकल्प के सचिव वरिष्ठ रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी ने कहा कि भिखारी ठाकुर सांस्कृतिक योद्धा थे। वे जीवन पर्यंत अपने गीतों एवं नाटकों के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध आवाज उठाते रहे। उनके द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक बिदेसिया में जहां पलायन का दर्द है, वहीं बेटी वियोग में एक स्त्री की पीड़ा प्रदर्शित होती है। दूसरे महत्वपूर्ण नाटक गबर घिचोर में स्त्री का संघर्ष मुखर होकर सामने आता है। भिखारी ठाकुर को किसी ने अनगढ़ हीरा कहा तो किसी ने भोजपुरी का शेक्सपियर तो किसी ने उनकी तुलना भारतेंदु हरिश्चंद्र से की, जबकि भिखारी ठाकुर अपने आप में लिजेंड थे। उनके नाटक आज भी समाज को दिशा व संदेश देते हैं। इस अवसर पर रंगकर्मी ट्विंकल गुप्ता, रिया वर्मा, खुशी कुमारी, भाग्य लक्ष्मी, खुशी, ज्योति वर्मा, तुषार पाण्डेय, राहुल चौरसिया, शिवम, रितिक, प्रीतम, यश गुप्ता, प्रियांशु चतुर्वेदी आदि उपस्थित रहे।
भोजपुरी को सांविधानिक दर्जा देना सच्ची श्रद्धांजलि
पूर। क्षेत्र के गढ़मलपुर सहुलाई स्थित रामनरेश सिंह एजुकेशनल फाउंडेशन के मुख्यालय पर लोक कलाकार भिखारी ठाकुर की 139वीं जयंती डॉ. शैलेश सिंह शौर्य के नेतृत्व में मनाई गई। नई पीढ़ी और भिखारी ठाकुर विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। इसमें वक्ताओं ने कहा कि भोजपुरी को सांविधानिक दर्जा देना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। भिखारी ठाकुर का जन्म 18 दिसंबर, 1887 को बिहार के सारण जिला में हुआ था। साल 1971 में उनका निधन हो गया। जपुरी सरधा मंच के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. शैलेश सिंह ने कहा कि अपने समय में ही भिखारी ठाकुर ने स्वस्थ और समतामूलक समाज का निर्माण कैसे हो, इसपर केंद्रित नाटक और गीत रचे थे। उनके नाटक और गीत आज भी प्रासंगिक हैं। मनु चौरसिया ने कहा कि विषमता युक्त समाज में भारतीय संस्कृति के लोक भावनाओं का मौलिक ध्वजवाहक भिखारी ठाकुर थे, जिन्होंने अंतिम पायदान पर बैठे समाज के अंतरात्मा के मौलिक स्वरूप का चित्रण किया। अभिषेक सिंह, सतीश गुप्ता, डॉ. जयशंकर सिंह, प्रतीक्षा रहीं।
भिखारी ठाकुर बहुमुखी प्रतिभा के लेखक थे
इंदरपुर। नगरा ब्लाॅक के पालचंद्रहा स्थित एक प्रतिष्ठान पर भिखारी ठाकुर की जयंती मनाई गई। केटीएस, कर्पूरी ठाकुर सेना के जिला महासचिव रामू ठाकुर ने कहा कि भिखारी ठाकुर बहुमुखी प्रतिभा के लेखक, गायक, नाटककार व अभिनेता थे। जिला संरक्षक लल्लन ठाकुर ने कहा कि भिखारी ठाकुर ने अपने नाटकों और गीतों के माध्यम से दहेज प्रथा, सामाजिक असमानता, प्रवासी मजदूरों की पीड़ा को विदेशिया, गबरघिचोर, बेटी बेचवा जैसी रचनाओं के माध्यम से बताया। भिखारी ठाकुर भोजपुरी संस्कृति और लोक रंग मंच के एक प्रमुख स्तंभ थे। उन्होंने अपनी कला से समाज को जगाया और भोजपुरी साहित्य को एक नई दिशा दी। उत्तम ठाकुर, अनिल ठाकुर, दिनेश ठाकुर व गोलू ठाकुर मौजूद रहे। संवाद