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Ballia News: कैसे मंगलमय हो सफर...एनएच 31 पर 39 किमी की दूरी में बने हैं 22 गति अवरोधक

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बलिया। एनएच 31 पर नियमानुसार गति अवरोधक बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। केवल रेडियम पेंटिंग के साथ स्पीड टेबल ब्रेकर लगाने का प्रावधान है। यह गांवों के सामने, बच्चों के स्कूल व मोड़ के दोनों तरफ लगाए जाते हैं। इसके बावजूद एनएच 31 पर मानक के विपरीत गति अवरोधकों की भरमार है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोटवां नारायनपुर से बलिया तक 39 किमी की दूरी में कुल 22 ब्रेकर हैं। बतौर उदाहरण चितबड़ागांव मोड़ के पास 100 मीटर की दूरी में ही चार उंचे गति अवरोधक बने हुए हैं। ऐसे में वाहनों के संचालन में होने वाली दिक्कतों का अनुमान लगाया जा सकता है।
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शासन के निर्देश के दो वर्ष बाद भी जिले की सड़कों पर ऊंचे गति अवरोधक ज्यों के त्यों बने हुए हैं। ये ब्रेकर जनपद से गुजरने वाली एनएच 31 के अलावा अन्य राज्य मार्गों पर हैं जो लोगों की परेशानी का सबब बन चुके हैं। इन खतरनाक ब्रेकरों से गुजरते समय वाहन जहां डगमगा जाते हैं वहीं गाड़ियों में बैठे यात्रियों को जोर का झटका लगता है। दो वर्ष पहले मुख्यमंत्री ने रोड सेफ्टी के तहत बताया था कि गति अवरोधक का निर्माण करते समय लोगों की सुविधा का ध्यान भी रखना आवश्यक है। गति अवरोधक टेबल टॉप हों ताकि बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं, मरीजों को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े। खराब डिजाइनिंग की वजह से अक्सर लोग गति अवरोधक के किनारे से वाहन निकालने का प्रयास करते हैं, जिससे दुर्घटनाएं भी होती हैं। निर्देश दिया था कि गति अवरोधक को ‘कमर तोड़ू’ न बनाया जाए। यह निर्देश दिया था कि जहां कहीं भी मानक के विपरीत गति अवरोधक बने हैं उन्हें तत्काल हटाया जाए और टेबल टॉप गति अवरोधक बनाए जाएं। लेकिन आज भी एनएच 31 से लेकर अन्य राज्यमार्गों व शहरी क्षेत्र की सड़कों पर बने बेतरतीब गति अवरोधक ज्यों के त्यों बने हुए हैं।

वर्ष हादसे मौत
2021 293 203
2022 234 170
2023 263 176
2024 158 89 (22 अप्रैल तक)

एनएच पर स्पीड ब्रेकर के निर्माण का कोई प्रावधान नहीं है। सड़क हादसे के बाद प्रशासन के निर्देश पर निर्माण कराया जाता है। जिले से गुजर रहे एनएच से कई जगह गति अवरोधक हटाए गए हैं। कुछ जगहों पर ग्रामीणों विरोध के चलते नहीं हटे, लेकिन यह भी जल्द ही हटा दिए जाएंगे।
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- एसपी पाठक, पीडी, एनएचएआई, आजमगढ़

खराब सड़कों व स्पीड ब्रेकर के कारण लोगों में सर्वाइकल की समस्या ज्यादा आ रही है। ओपीडी में आठ से दस फीसदी मरीज आ रहे हैं। सबसे ज्यादा खतरा बाइक चालकों को होता है। उन्हें कुछ दिन तक बाइक न चलाने की सलाह दी जाती है।
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डा. संतोष चौधरी, आर्थो सर्जन, जिला अस्पताल।
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