बलिया जिला अस्पताल में कागजों पर तो सुविधाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन धरातल पर सुविधाओं की कमी है। छठ की छुट्टी के बाद शुक्रवार को अस्पताल खुला तो मरीजों की भीड़ उमड़ी। लेकिन व्हीलचेयर और स्ट्रेचर की कमी से मरीजों को परेशान होना पड़ा। ओपीडी में 1272 मरीज इलाज कराने पहुंचे।
कई मरीज ऐसे भी पहुंचे जो बीमारी की वजह से चलने-फिरने में लाचार थे। इमरजेंसी व ओपीडी से पैथोलॉजी व एक्स-रे कक्ष तक इन्हें ले जाने के लिए तीमारदारों को खासी परेशानी से जूझना पड़ा। व्हीलचेयर न होने की वजह से तीमारदार अपने मरीजों को गोद में उठाकर या दूसरे के भरोसे ओपीडी से पैथोलॉजी तक ले जाते दिखे।
मरीज के साथ एक तीमारदार आने से वाहन से उतारकर इमरजेंसी में ले जाने में परेशानी होती है। यह रोज की समस्या है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन की ओर से इमरजेंसी व ओपीडी में व्हीलचेयर की प्रर्याप्त व्यवस्था नहीं की गई है।
इमरजेंसी के सामने रखे अधिकतर स्ट्रेचर खराब
इमरजेंसी के सामने दो तीन स्ट्रेचर रखे जाते हैं। लेकिन किसी का पहिया टूटा है तो किसी की पाइप टूटी है। स्ट्रेचर पर मरीज को ले जाने के लिए दो से तीन तीमारदार की जरूरत होती है। जिससे तीमारदार व्हीलचेयर की मांग करते हैं। पूरे अस्पताल में सिर्फ दो व्हीलचेयर हैं, दोनों का पहिया टूटा है। मरीज को ले जाते समय गिरकर घायल होने का डर बना रहता है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एके यादव की माने तो इमरजेंसी के सामने मरीजों की सुविधा के लिए स्ट्रेचर व व्हीलचेयर रखी जाती है। अस्पताल के दोनों परिसर के बीच रास्ता खराब होने से व्हीलचेयर व स्ट्रेचर का पहिया आए दिन खराब हो जा रहा है। इसे ठीक करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया, लेकिन बजट के अभाव में नहीं बन सका। कम संसाधन के बावजूद बेहतर इलाज व सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है।