बांसडीह। महाराजपुर के नाहर छपरा गांव में घाघरा की तेज कटान से बस्ती पर खतरा मंडराने लगा है। नदी और घरों के बीच कहीं 10 मीटर, कहीं 15 मीटर तो कहीं महज 20 मीटर की दूरी बची है।
कटान की रफ्तार यही रही तो एक सप्ताह के भीतर नदी किनारे के कई घरों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है। इससे ग्रामीणों में दहशत है। कुछ परिवार घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने लगे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा के जिला संयोजक परमात्मा नंद राय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को गांव पहुंचकर कटान का जायजा लिया। ग्रामीणों ने बताया कि नदी तेजी से कटान कर रही है। पलटू, त्रिभुवन, धनु, कृष्णा, निठाली, छोटू यादव और शिवमुनि समेत कई लोगों के घर नदी के बेहद करीब हैं।
कटान से चिंतित सन यादव और सुदामा यादव अपना घर उजाड़कर सामान दूसरी जगह ले जा चुके हैं। अन्य परिवार भी पलायन की तैयारी में हैं। कटान रोकने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से मिट्टी गिराई जा रही है। बोरियों में मिट्टी भरकर नदी किनारे डाला जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कटान की रफ्तार इतनी तेज है कि ये अस्थायी उपाय नदी के सामने टिक नहीं पाएंगे। उन्होंने बताया कि वर्षों पहले गांव के पश्चिम चांदपुर में मजबूत ठोकर बनाया गया था। जो आज भी गांव को बचाए हुए है। इसी तरह नाहर छपरा में भी स्थायी और मजबूत ठोकर बनाने की जरूरत है।
संयुक्त किसान मोर्चा के जिला संयोजक परमात्मा नंद राय ने जिलाधिकारी से प्रभावित घरों को बचाने के लिए स्थायी ठोकर बनवाने और कटान पीड़ितों को उचित मुआवजा देने की मांग की। वहीं, लक्ष्मण पांडे ने आरोप लगाया कि वर्षों से तैनात एक इंजीनियर की वजह से पूरे क्षेत्र की दुर्दशा हुई है। प्रतिनिधिमंडल में बंशीधर पासवान, पुतुल, राकेश, योगेश राठौर और लालजी यादव सहित अन्य लोग शामिल रहे।