शिक्षक और छात्र का पवित्र संबंध हमारी गौरवशाली परंपरा रही है। शिक्षक छात्र के गुणों को निखार कर राष्ट्र के लिए समर्पित करता है। शिक्षा में ज्ञान के साथ संस्कार का भी महत्व है। हमारी शिक्षा व्यवस्था कभी भी व्यावसायिक नहीं रही। शिक्षा को सदैव ही सेवा कार्य माना गया है। ये बातें सांसद वीरेंद्र सिंह ने रविवार को शैक्षिक संवर्धन गोष्ठी व शिक्षक सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
एएनआई के मुताबिक मंदी पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में और दुनिया में मंदी के बारे में चर्चाएं हो रही हैं पर अगर सच में कोई मंदी होती तो हम यहां पर कुर्ता धोती पहन कर आते न कि जैकेट और कोट। अगर कोई मंदी होती तो हम कभी भी कपड़े, पैंट और पजामे आदि नहीं खरीद पाते।
कलेक्ट्रेट के ड्रामा हाल में आयोजित कार्यक्रम में सांसद ने गुरु वशिष्ठ, गुरु संदीपन तथा द्रोणाचार्य और उनके शिष्यों के अमरतत्व की चर्चा की। कहा कि आप जो शिक्षा दे रहे हैं, वही भारत की शिक्षा है। शिक्षा की तिजारत करने वालों से घबराना नहीं है। भारत की शिक्षा, अर्थव्यवस्था व संस्कृति सबसे अच्छी है। विद्या को व्यवसाय बनाने वालों के दिन लदेंगे।
कहा कि कर्मवीर कभी सम्मान का आकांक्षी नहीं होता। इससे उसकी आदर्शवादिता प्रभावित होती है। विशिष्ट अतिथि बीएसए शिवनारायण सिंह ने कहा कि 2009-10 बैच का मैं भी शिक्षक रहा हूं। आपको कुछ ऐसा करना है कि बेसिक शिक्षा की तस्वीर बदले।
अपने दायित्वों एवं कार्यों को ईमानदारी से करें। इस मौके पर बीईओ प्रभात श्रीवास्तव, धर्मेंद्र कुमार, राजेश सिंह, जिला उपाध्यक्ष राजेश सिंह आदि रहे। अध्यक्षता जिला संयोजक राजेश सिंह व संचालन रविकांत तिवारी ने किया।
राज्य स्तर पर उत्कृष्ट विद्यालय सम्मान से सम्मानित शिक्षक उमेश कुमार सिंह, प्रतिमा उपाध्याय व अनिल वर्मा के साथ ही रंजना पांडेय, शक्ति सिंह, मंटू सिंह, जंग बहादुर यादव, कविता सिंह समेत जनपद के तीन दर्जन से अधिक शिक्षकों को सम्मानित किया गया।