बैरिया तहसील में कराए गए मनरेगा कार्यों की सीबीआई जांच शुरू कर हो गई है। मनरेगा कार्यों में धांधली का ज्यादा असर बैरिया, मुरलीछपरा एवं रेवती विकास खंड में है।
विकास कार्यों में किए गए गोलमाल की जांच शुरू होने से लोगों में हड़कंप मच गया है। सीबीआई की टीम सबसे पहले प्रशासन से मनरेगा से जुड़े विकास कार्यों की पत्रावली तलब की है।
वहीं, गांवों में मनरेगा के तहत कराए गए विकास कार्यों की पत्रावली दुरुस्त करने के लिए विभागीय अफसरों ने निर्देश दिए हैं। इस कार्य में ग्राम प्रधान और सचिव जुट गए हैं।
सीबीआई अपने जांच में सबसे पहले किस गांव को अपना निशाना बनाएगी। यह तो समय ही बताएगा। ऐसे में सैकड़ों गांव के प्रधान और सचिव जांच के घेरे में आ सकते हैं।
मनरेगा योजना के तहत वर्ष 2007 से 2010 तक के कराए गए विकास कार्यों की सीबीआई जांच शुरू हो गई है। केंद्र सरकार को धन के बंदरबांट की शिकायत मिली थी। सरकार ने छह माह पहले इस मामले में जांच बैठाई थी। अब मनरेगा से संबंधित पत्रावलियों को सीबीआई ने तलब किया है।
इससे अफसरों की धड़कने बढ़ गई है। गांवों में निर्माण और विकास कार्य कराए बगैर ही उस धन का आहरित करने का मामला प्रकाश में आ चुका है। मनरेगा के करोड़ों रुपये को किस तरह से लूटा गया है।
यह जांच के बाद भी सामने आएगा। सीबीआई ने विभागीय अधिकारियों से ब्लाकवार कितना धन खर्च किया गया है, इसका पूरा ब्यौरा मांगा है।
बैरिया तहसील प्रशासन ने क्षेत्र के विभिन्न ब्लाकों में कराए गए कार्यों का आंकड़ा देते हुए 13.50 करोड़ का रिपोर्ट 15 दिन पहले भेजा है, जिसमें कुल 69 ग्राम सभाओं में मनरेगा के तहत कार्य कराया गया है।
जबकि सीबीआई ने दोबारा रिपोर्ट तलब करते हुए पूछा है कि उस धन में कहां-कहां विकास कार्य किया गया। जिसका रिकार्ड दिया जाए।
वहीं ग्राम पंचायतों के सचिव और ग्राम प्रधान भी इस रिकार्ड को ढूंढने में लगे हुए है। करीब पांच साल के रिकार्ड को एकत्र करने में दो सत्रों के ग्राम प्रधान शामिल है।
अधूरे रिकार्डों को तैयार करने में लगे कर्मचारियों के पसीने छूट रहे हैं। मामले में बैरिया उपजिलाधिकारी राधे श्याम पाठक ने कहा कि सीबीआई जांच चल रही है। तहसील के सभी ब्लाकों से रिपोर्ट मांगी गई है।