Holashtak: होलाष्टक दो शब्दों से मिलकर बना है, 'होली' व 'अष्टक' जिसका अर्थ है आठ दिनों की अवधि। यह फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर 'होलिका दहन' तक रहता है। होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेगा। इस दौरान कोई भी मांगलिक कार्य करना निषेध होता है। आचार्य पं. अखिलेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि होलाष्टक के साथ मौसम परिवर्तन शुरू हो जाता है।
सूर्य का प्रकाश तेज होता है। हवाएं ठंडी रहती हैं। ऐसे में व्यक्ति रोग की चपेट में आ जाता है। इस समय मन की स्थिति अवसाद ग्रस्त रहती है। होलाष्टक के समय सभी ग्रह उग्र अवस्था में होते हैं। इसलिए इस दौरान जो शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका उत्तम फल प्राप्त नहीं होता है। इसलिए मांगलिक कार्य करना निषेध माना जाता है। होलाष्टक में विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण, मुंडन संस्कार व नये व्यवसाय की शुरुआत नहीं करनी चाहिए।