बलिया। कोविड-19 काल में जिले में संक्रमण को कमतर करने एक ओर जहां कोरोना वारियर्स की अहम भूमिका रही तो दूसरी ओर संक्रमित हुए मरीजों को उपचार देकर स्वस्थ करने में चिकित्साकर्मियों का प्रयास भी सराहनीय रहा। उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार बल्कि अपने छोटे-छोटे बच्चों को भूल कर सेवा को अपना मिशन बना डाला। जिसकी बदौलत बसंतपुर स्थित एल-वन अस्पाल में कोविड-19 का उपचार कराने आए अधिकांश लोग स्वस्थ होकर अपने घर लौटे। अगर आज जिले में कोरोना महामारी की असर कम हुआ है तो इसके लिए ये योद्धा साधुवाद के पात्र हैं, जिन्होंने अपनी जान की परवाह किए बगैर आमजन की हिफाजत की। तब बगैर वैक्सीन के कोविड-19 से पार पाना नामुमकिन सा प्रतीत हो रहा था, लेकिन इन वारियर्स ने उसे मुमकिन कर दिखाया। वैसे तो उस दौर में सारी व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो गई थीं, जो जहां था वहीं थम सा गया था, लेकिन उस दौर में स्वास्थ्य विभाग के इन योद्धाओं ने संक्रमण काल में ना सिर्फ वारियर्स की भूमिका अदा की बल्कि अपनी जान की परवाह किए बगैर आमजन की सुरक्षा के लिए निरंतर प्रत्यत्नशील रहे।
कोरोना संक्रमण काल मे बच्चे एवं घर के बूढ़े-बुजुर्ग को छोड़कर ड्यूटी करनी पड़ती थी। फिर भी हम हिम्मत नहीं हारे और पूरे उत्साह के साथ अपने फर्ज को निभाया। लोगों से मेरी अपील है कि अभी कोरोना से अपना बचाव करें एवं मॉस्क का प्रयोग अवश्य करें। - प्रीति गुप्ता, एएनएम, आरबीएसके टीम।
कोरोना काल में मेरी ड्यूटी एल-वन फैसिलिटी सेंटर नगवां में लगी थी। मेरा तीन वर्ष का बच्चा है। मैं उसे घर पर छोड़कर ड्यूटी करने जाती थी। जबकि मेरे पति सीआरपीएफ में है। बच्चों को किसी तरह मेरी सास ने संभाला, लेकिन मैंने सब कुछ छोड़कर ड्यूटी का फर्ज निभाया। - इंदू यादव, स्टॉफ नर्स
मेरी ड्यूटी प्रसव कक्ष में नर्स मेंटर के पद पर लगी थी। बिना अवकाश लिए मैंने लगातार ड्यूटी किया। इस दौरान मुझे अपने छोटे बच्चों से मिलने में महीने भर का समय लग जाता था। इस दौरान ड्यूटी करना भी जोखिम भरा कार्य था। इसके बावजूद जान जोखिम डालकर अपने फर्ज का निर्वहन किया। - प्रीति पांडेय, नर्स मेंटर
कोरोना काल में हमारी ड्यूटी प्रसव कक्ष में लगी थी। बहुत सावधानी बरतते हुए ड्यूटी करना पड़ता था, लेकिन हमने अपने कर्तव्य से बिना मुंह मोड़े पूरे उत्साह के साथ ड्यूटी किया। अपने कर्तव्य के प्रति पूरी निष्ठा एवं इमानदारी से काम किया। - आशा देवी, एएनएम