फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शिवमंदिर का आधा हिस्सा नदी में

Wed, 10 Aug 2016 10:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरोः बलिया
विज्ञापन
भुसौला गांव में डेढ़ सौ साल पुराने मंदिर को निगलने को आतुर गंगा की लहरें।
विज्ञापन
 गंगा का जलस्तर बढ़ने से तटीय गांवों में कटान शुरू हो गया है। मंगलवार की रात जगदीशपुर गांव का लगभग 150 साल पुराना शिव मंदिर का आधा से अधिक हिस्सा गंगा में समाहित हो गया, वहीं ग्रामीणों की करीब एक एकड़ से अधिक कृषि योग्य भूमि कटान की भेंट चढ़ गई। अचानक शुरू हुए कटान से गांव में हड़कंप मच गया।
विज्ञापन



बता दे कि जगदीशपुर गांव से मात्र 50 मीटर की दूरी पर गंगा बह रही हैं। मंगलवार के रात में गंगा के बढ़ते पानी व तेज धारा से 150 वर्ष पुराना शिव मंदिर का आधा भाग गंगा नदी में विलीन हो गया। मंदिर कटने की जानकारी होते ही काफी संख्या में लोग वहां पहुंचे। गंगा की लहरे मंदिर की दीवार पर दबाव बनाए हुए है। ऐसे में कभी भी पूरा मंदिर नदी में समा सकता है। ग्रामीणों की माने तो यह मंदिर काफी पुराना था, यहां गांव ही नहीं बल्कि दूर-दूर से श्रद्धालु पूजन करने आते हैं। वहीं, गंगा के जलस्तर में वृद्धि के चलते मुरार पट्टी के किसानों की करीब एक एकड़ कृषि योग्य भूमि नदी में समाहित हो गई। कटान का सिलसिला जारी रहा है तो अगले दो-तीन दिनों में गांव के आवास भी कटान की जद में आ जाएंगे। लालगंज संवाददाता के अनुसार गंगा का कटान वर्ष 1980 में इस क्षेत्र में शुरू हुआ था, जिसमें भुसौला गांव के दर्जनों घर गंगा में समाहित हो गए थे। तब तत्कालीन सांसद चंद्रशेखर के प्रयास से इस गांव को बचाने के लिए 9 स्परों का निर्माण 1982 में कराया गया तथा कटान पीड़ितों के लिए सोनबरसा मौजा में पट्टा कटवाकर रहने की व्यवस्था कर दी गई।


 स्परों की वजह से इस क्षेत्र में कटान रुक गया था परंतु 2010 में पुन: क्षेत्र में कटान शुरू हो गया तो तत्कालीन विधायक सुभाष यादव ने करीब नौ करोड़ रुपए की लागत से कटानरोधी कार्य करवाया, परंतु यह कटानरोधी कार्य आगे के कटान को नहीं रोक सका और 2012-2013 में जगदीशपुर और भुसौला दोनों गांव में जबरदस्त कटान शुरू हो गया, जिसमें भुसौला गांव का अस्तित्व ही समाप्त  हो गया।
विज्ञापन



इस कटान से बेघर हुए करीब पचासों घर के कटान पीड़ित आज भी सिंचाई विभाग के डाक बंगले से लेकर प्राथमिक विद्यालय जगदीशपुर व किराए के मकानों में लोग रहने के लिए विवश हैं। इनके लिए शासन प्रशासन से किसी भी प्रकार की कोई भी जमीन घर बनाने के लिए नहीं दी गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें