बलिया। राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना जिले में परवान चढ़ती नहीं दिख रही है। कारण साफ है कि योजना का लाभ लेना तो दूर पशुपालकों को इसके बारे में जानकारी तक नहीं है। स्वदेशी दुधारू पशुओं को बढ़ावा देने के लिए योजना संचालित की गई थी। इस योजना के तहत स्वदेशी पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान को नि:शुल्क रखा गया था।
इस योजना में शहरी क्षेत्र के अलावा जिले की 940 ग्राम पंचायतों को शामिल किया है। इस योजना को लेकर जब पशु पालकों से बात की तो अधिकांश लोग ऐसे मिले, जिन्हें योजना के बारे में ही जानकारी ही नहीं है। इस योजना के अंतर्गत पशुपालकों को दुग्ध उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार करने के साथ ही वैज्ञानिक रूप से वृद्धि करने के विषय में बताया जाना है। मुख्य उद्देश्य स्वदेशी नस्ल के गोवंश को बढ़ावा देना है। इसके साथ ही पशुओं को विभिन्न प्रकार की प्राण घातक बीमारियों से बचाना है। योजना के माध्यम से लाल सिंधी, गिर, थारपरकर और साहीवाल आदि जैसी उच्च कोटि की स्वदेशी नस्लों का उपयोग करके अन्य नस्लों की गायों का विकास करना है।
बोले पशुपालक, नहीं मिला कोई लाभ
टेड़वा के मठिया गांव निवासी पशुपालक हरेराम यादव का कहना है मिशन गोकुल योजना शुरू की गई है, लेकिन पशुपालकों को इसका लाभ मिलना तो बहुत दूर, उन्हें योजना के की पूरी जानकारी तक नहीं है और न ही इस योजना का किसी भी पशुपालक को अभी तक लाभ मिला। नरही निवासी जवाहर राय का कहना है कि योजना के तहत क्षेत्र के ज्यादातर पशुपालकों को योजना जानकारी नहीं है। इसी वजह से योजना परवान नहीं चढ़ सकी है। नरही गांव निवासी राजेंद्र पांडेय के अनुसार मिशन गोकुल जैसे कोई योजना है, उन्हें जानकारी नहीं है और न हीं उन्हें आज तक योजना का लाभ मिला है। योजना सिर्फ कागजों में चल रही है। शाहपुर बभनवली के त्रिवेणी यादव ने बताया कि उन्हें इस योजना की कोई जानकारी नहीं है।
राष्ट्रीय मिशन गोकुल योजना में पशुपालकों को कृत्रिम गर्भाधान का लाभ मिलता है। इसके अंतर्गत पशुओं का कृत्रिम गर्भाधान किया जाता है। इस योजन के संबंध में पशुपालन विभाग की टीम गांव-गांव जाकर पशुपालकों को जानकारी दे रही है। लगभग 50 प्रतिशत कार्य हो चुका है। जल्द पूरे जनपद को कवर कर लिया जाएगा।
-डॉ संजय श्रीवास्तव, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, पशुपालन विभाग, बलिया।