हल्दी। कोरोना महामारी में जिला प्रशासन ऐसा उलझा है कि अन्य कार्य उपेक्षा की भेंट चढ़ रहे हैं। जिसका कोई सरकारी मुलाजिम पुरसा हाल लेना जरूरी नहीं समझ रहा है। कुछ ऐसा ही हाल मुख्यमंत्री की महात्वाकांक्षी योजना गो आश्रय स्थल का है, जिसे सरकार ने गोवंश मवेशियों को संरक्षित करने के लिए चला रखा है। लेकिन उपेक्षा का आलम यह है कि गो आश्रय स्थल में रहने वाले मवेशी खुले आसमान के नीचे जैसे-तैसे रह रहे हैं। इतना ही नहीं अब उनके सामने निवाले का संकट कायम हो गया है। पर्याप्त टिन शेड के अभाव में गोवंश मवेशी बारिश में भीगने को विवश हैं। कुछ ऐसा ही हाल क्षेत्र के ग्राम सभा बघऊंच में बने गौ आश्रय केंद्र का हैं, जहां गोवंशों के रख-रखाव और उनके चारे के लिए पिछले छह माह से सरकारी भुगतान नहीं हुआ है।
गांवों में छुट्टा घूमने वाले गौ वंशों के लिए प्रदेश सरकार सभी न्याय पंचायतों में गौ आश्रय स्थल बनवाया है। ग्राम पंचायत बघऊंच में बने गो आश्रय स्थल में चार सौ से अधिक गौ वंश मवेशी रहते हैं। इसके बावजूद पिछले छह माह से इन पशुओं की देखभाल के लिए सरकारी विभाग से एक ढेला भी नसीब नहीं हुआ है, जिससे मवेशियों के चारा-पानी और बरसात के दिनों में उन्हें रखने में दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। गौ आश्रय स्थल के अध्यक्ष संतोष सिंह बच्चाजी ने बताया कि एक पशु के लिए एक दिन में 30 रुपये मिलते हैं, लेकिन उच्चाधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी पिछले छह माह से भुगतान नहीं हुआ। शेड के अभाव में करीब 150 गाय निरंतर धूप व बारिश में भीग रहे हैं। जनवरी माह में जिलाधिकारी का औचक निरीक्षण हुआ था। तब डीएम ने गोवंश मवेशियों को रखने के लिए टिन शेड देने की घोषणा की थी, जो पास भी हो गया है, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य नहीं हुआ। बताया कि धन के अभाव में पशुओं को चारा-पानी की भी दिक्कत हो रही है।