रामगढ़। गंगा की उफनाती लहरें अब लाल निशान छूने को बेताब हो गई है। गंगा का जलस्तर में इसी तरह बढ़ाव बना रहा, तो जल्द ही गंगा खतरे के निशान को पार कर जाएगी। गंगा जलस्तर में बेतहाशा वृद्धि होने के कारण गंगा नदी की धारा की बैकरोलिंग का दबाव पचरुखिया से लेकर के दुबे छपरा तक बने ठोकरों पर पड़ना शुरू हो गया है। साथ ही आरारों के कटकर गिरने का सिलसिला शुरू हो गया है।
बता दें कि सुघर छपरा गांव के सामने सोमवार के सुबह अरारों का गिरना शुरू हो गया। इस स्थिति को देखते ही सुघर छपरा गांव में भगदड़ मच गई। ग्रामीणों का आरोप है कि का शासन स्तर से स्वीकृत 10 करोड़ की परियोजनाओं को ठेकेदार व विभागीय अधिकारी गंभीरता से लिए होते तो शायद आज यह नौबत ही आती। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार जानबूझकर पर योजनाओं के काम को बीच मझधार में छोड़ दिया गया। विभागीय अधिकारी ठेकेदारों पर कार्रवाई करने के बजाय चुप बैठे हुए हैं। यही स्थिति दुबे छपरा अनुसूचित बस्ती के सामने की है। जहां पर नदी कटान करना शुरू कर दी है। पीड़ितों का कहना है कि अगर लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई नहीं की गई तो हम लोग सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे।
गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण मझौवा, दिअरी, शुक्ल छपरा, डांगरबाद मौजा, जग छपरा बाबूबेल मौजा में बोई गई सैकड़ों बीघे फसल डूब गई है। इसके कारण किसानों के माथे पर भी चिंता की लकीरें उभरनी शुरू हो गई है। अगर गंगा का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो जल्द ही आधे दर्जन से अधिक गांव टापू में तब्दील हो सकते हैं।
केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर सोमवार के 12:00 बजे करीब 56.260 मीटर दर्ज किाय गया। साथ ही प्रति घंटा आधा सेंटीमीटर का बढ़ाव बना हुआ है। खतरा बिंदु 57.615 मीटर है। गंगा के ऊपर तेवर को देखते हुए बाढ़ विभाग अब फ्लड फाइटिंग के तहत मिटी से भरी बोरियों को गंगापुर से लेकर दुबे छपरा तक बने ठोकरों पर डम्प करने शुरू कर दिया है। ताकि किसी भी परिस्थिति से निपटा जा सके।