बलिया/मझौवां। गंगा नदी का जलस्तर बीते छह दिनों से स्थिर है। शुक्रवार की शाम को भी गंगा का जलस्तर स्थित रहा लेकिन बाढ़ की आशंका लोगों में बनी है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गायघाट गेज पर शुक्रवार की शाम 4 बजे गंगा का जलस्तर 59.170 मीटर दर्ज किया गया। खतरे के निशान 57.615 मीटर की जगह जलस्तर 58.615 मीटर है। इससे गांवों में पानी ठहरा हुआ है। अब गांवों की पानी ठहरने से बदबू आने लगी है।
शुक्ल छपरा, जग छपरा, सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, प्रसाद छपरा, वंश गोपाल छपरा, मिश्र के हाता, मुरली छपरा, बुधनचक, बड़का बुधनचक, चिंतामणि राय के टोला, गुदरी राय के टोला, पांडेयपुर, नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की नौरंगा और उपाध्याय टोला समेत दर्जनों गांव अब भी बाढ़ की मार झेल रहे हैं।
निचले हिस्सों में बसे लोग बाढ़ के पानी से घिरे हैं, जबकि ऊंचे स्थानों पर पहुंचे ग्रामीणों को कीचड़ और सड़न भरी दुर्गंध ने परेशान कर रखा है। चक्की नौरंगा के बाढ़ पीड़ितों की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। कई परिवार तटबंधों पर शरण लिए हुए हैं। उनके सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है।
गलियों में जलभराव से बढ़ी परेशानी: दया छपरा। बाढ़ का पानी अब बाढ़ पीड़ितों के लिए कोढ़ में खाज साबित हो रहा है। संपर्क मार्गों से भले ही बाढ़ का पानी निकल गया है, लेकिन गांव की गलियों और निचले इलाकों में अब भी पानी जमा है। ग्रामीणों को इसी गंदे पानी से होकर घरों तक आना-जाना पड़ रहा है।
इसके चलते लोगों में खुजली और पैरों में सड़न की शिकायत बढ़ने लगी है। चिंतामणि राय के टोला निवासी बाढ़ पीड़ित धनंजय सिंह ने बताया कि पानी कम होने के बाद परेशानी और बढ़ गई है। अब नाव भी नहीं चल पा रही है और गलियों में जमा पानी से होकर पैदल गुजरना मजबूरी बन गई है। लगातार गंदे पानी में पैर रहने से खुजली और पैरों में सड़न की समस्या होने लगी है।