Gayatri Maha Sthim pier power back flood waters spread around houses in the residential area.
जनपद इस समय पूरी तरह बाढ़ की चपेट में है। गंगा की लहरें मीडियम फ्लड लेवल को गुरुवार को पार कर गई जिससे दर्जनों गांव डूब गए। टोंस और मगई नदी भी जमकर कहर बरपा रही हंै। गंगा किनारे इस समय भगदड़ और रुदन-क्रंदन की स्थिति है। कोई अपने हाथों अपने घरौंदे को उजाड़ रहे हैं तो कोई अपनी आंखों के सामने अपने आशियाने को गिरते हुए देखने को विवश हैं। जिसके चलते क्षेत्र के आधे दर्जन गांव बाढ़ के पानी से घिर गए। उफनाती लहरें चौबे छपरा व श्रीनगर में चार लोगों के मकानों को अपना ग्रास बना लिया।
रामगढ़ में गंगा की प्रलयकारी लहरें गुरुवार को विनाशकारी दिखाई दीं। गंगा की कैंची लहरें चौबेछपरा निवासी जयप्रकाश मिश्र, श्रीनगर निवासी दरोगा सिंह, सुरजीत सिंह, अमरजीत सिंह, रामजीत सिंह, हरेन्द्र सिंह के घरों को तथा रिहायशी जमीन को अपने पेटे में समाहित कर ली। क्षेत्र के निचले सतह पर पानी फेलने के चलते केहरपुर, सुघर छपरा, पचरूखिया, मझौंवा शुक्लछपरपा, बाबूबेल, बादिलपुर, बघौंचा पोखरा गांव पानी से घिर गए । क्षेत्रीय विधायक जय प्रकाश अंचल, भाजपा नेता, मुक्तेश्वर सिंह चौबेछपरा पहुंचकर पीड़ितों की हालत देमखी और अपने स्तर से जनरेटर उपलब्ध कराने की बात कही। केन्द्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार गंगा का जलस्तर 58.75 मीटर दर्ज की गई। साथ ही प्रतिघंटा दो सेमी का बढ़ाव बना हुआ है। चौबेछपरा निवासी विनोद पासवान का कहना था कि बाढ़ विभाग के अधिकारी समय रहते बाढ़ से बचाव के लिए यह कार्य किए रहते तो शायद हम पीड़ितों के घरौंदे को उजाड़ना नहीं पड़ता।
कमला मिश्र का कहना है कि अचानक बुधवार की शाम बाढ़ विभाग के अधिकारी चौबे छपरा पहुंचे और हरे पेड़ों को काटकर नदी की धारा में डालना शुरू किए। रिखदेव खरवार का कहना था कि बाढ़ विभाग के अधिकारी व ठेकेदार यही काम जलस्तर गिरने के बाद करते तो शायद कुछ सकारात्मक पहल देखने को मिलती । धनंजय पासवान का कहना है कि जहां पर यह विभाग असफल प्रयास कर रहा है। वहीं पर नदी की गहराई कम से कम 100 फीट है । जिसके चलते यह नौबत बनी हुई है । बाढ़ विभाग के सहायक अभियंता योगिंद्र यादव ने बताया कि चौबे छपरा में बंबू क्रेट विधि से कटान को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।