रामगढ़। गंगा नदी के जल स्तर में पिछले दस दिनों से लगातार हो रहे वृद्धि के साथ ही तटवर्ती गांव के लोगों की बेचैनी बढ़ना यह बता रहा है कि जो बचाव के नाम पर हो रहे कटान रोधी कार्य को सिचाई विभाग अगर समय से शुरू किया होता तो आज यह नौबत देखने को नहीं मिलता। नौरंगा में चल रहे पार्कोपाइन विधि के लिये जो सीमेंटेड पिलर जो कंक्रीट सरिया व सीमेंट युक्त तैयार किया गया है वह नदी में खड़ा करते ही उसके परखच्चे उड़ जा रहे हैं। ऐसे में विभाग के मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि हर साल बाढ़ व कटान से बचाव के नाम पर अगर ऐसे ही सरकारी धन का बंदरबांट होता रहा तो दर्जनों गांव के लोगों को कटान से निजात मिलने वाली नहीं है। इसके साथ ही जो बालू भरी ईसी बैग बोरी का पानी के अन्दर बेस बनाया गया था, अब उसके उपर डेढ़ से दो मीटर तक नदी का जलस्तर होने के कारण विभाग एवं ठेकेदार दोनों की मिली भगत से मानक के अनरुप कार्य नहीं किया जा रहा है। इस तरह का आरोप ग्रामीणों के द्वारा लगाया जा रहा है। हर साल बाढ़ और कटान से बचाव के नाम पर बाढ़ विभाग और उसके ठेकेदारों द्वारा जमकर लूटखसोट किया जाता हैं, उसके बाद भी सरकार द्वारा अरबों रुपए हर साल खर्च होता आ रहा है।
घाघरा नदी में भी बढ़ने लगा जलस्तर
बेल्थरारोड। घाघरा नदी के जलस्तर में धीरे-धीरे वृद्धि का सिलसिला जारी है। जलस्तर में वृद्धि के चलते तटवर्ती दर्जनों ग्रामों के हजारों लोग बाढ़ की आशंका को लेकर सहम गए हैं। नदी का पानी धीरे-धीरे टीएस बंधे के करीब पहुंचना शुरू कर दिया है। जलस्तर में वृद्धि का क्रम जारी रहा तो तटवर्ती ग्रामों की कृषि भूमि व फसलें जलमग्न हो जाएंगी। इसको लेकर तटवर्ती चैनपुर गुलौरा, महुआतर, खैरा खास, तुर्तीपार, बेल्थराबाजार, सहिया, हल्दीरामपुर आदि ग्रामों के हजारों लोग अत्यंत चिंतित हैं। जलवृद्धि के साथ ही बाढ़ और कटान की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। हालांकि कटान की रोकथाम के लिए टीएस बंधे और नदी के बीच तीन किलोमीटर के क्षेत्रफल में पांच ठोकर निर्माण होना है। ठोकर निर्माण अधूरा है। ऐसे में बाढ़ के दिनों में कटान के चलते तटवर्ती लोगों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी।