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Ballia News: लाल निशान से 82 सेमी नीचे गंगा, 60 गांव बन गए टापू, संपर्क मार्गों पर 5 फीट पानी

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बाढ़ के पानी से ​घिरे दुबहर थाना परिसर में सीज किए गए वाहन।संवाद
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मझौवां / दयाछपरा। गंगा नदी के जलस्तर में शुक्रवार को एक सेेमी प्रतिघंटे वृद्धि दर्ज की गई। नदी का जलस्तर लाल निशान से 82 सेंटीमीटर नीचे है। नदी के जलस्तर में इसी तरह की वृद्धि रही तो कुछ घंटों में लाल निशान को पार कर जाएगी। बाढ़ के पानी से 71 गांवों की 60 हजार की आबादी इस समय प्रभावित है। पांच दर्जन से अधिक गांव टापू बने हुए हैं।
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एनएच से जाने वाले संपर्क मार्गों पर 5 फीट पानी भरा है, लोग कंधे पर बच्चों को उठाकर जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। बाढ़ से ग्रस्त 19 गांवों की बिजली सप्लाई बंद कर दी गई है। गंगा की लहरें चक्की नौरंगा में अधिक कहर बरपा रही है। अब तक सिर्फ चक्की नौरंगा में 36 मकान गंगा की धारा में समा गए है। शुक्रवार को टेंगर राम और विक्रम राम का आशियाना तास की पत्तों के तरफ कटान के भेंट चढ़ गया। वीरेंद्र राम और सीता राम ने कहा कि प्रशासन के तरफ से हम लोगों को कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई गई है। शुद्ध पेयजल, भोजन, राहत कीट, पशुओं के चारें, रोशनी, नाव से अब तक वंचित हैं। बच्चे बुजुर्ग महिलाएं दाने-दाने के लिए मोहताज है। एसडीएम बैरिया आलोक प्रताप सिंह चक्की नौरंगा के कटान पीड़ितों के बीच पहुंच कर स्थिति का जायजा लिया। भरोसा दिया कि प्रशासन हर आपदा के घड़ी में आपके साथ है। गंगा की लहरें राष्ट्रीय राजमार्ग-31 के संवेदनशील प्वाइंट व निर्माणाधीन किमी 26.250 पर सीधा टकरा रही है। केन्द्रीय जल आयोग गायघाट गेज पर शुक्रवार की शाम 4 बजे गंगा का जलस्तर 59.570 मीटर दर्ज किया गया। हर घंटे 1 सेमी प्रतिघंटा की रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। जलस्तर लाल निशान से 1.955 मीटर ऊपर पहुंच गया है। नदी का हाई फ्लड़ लेबल 60.390 के बीच का फासला 0.820 सेमी है।
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शहर के निचले इलाकों में बढ़ी दुश्वारियां
बलिया। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ाव पर होने से कटहलनाला के माध्यम से पानी सुरहाताल में गिरने लगा है। कटहलनाला के माध्यम से शहर के गायत्री कालोनी, निहोरा नगर, बेंदुआ समेत अन्य मोहल्ले में पानी तेजी से बढ़ता चला जा रहा है। घरों में पानी घुसने से लोग छतों पर शरण लिए हुए है। उनके सामने बच्चों के स्कूल भेजने से लेकर भोजन तक की समस्या खड़ी हो गई है। ददरी मेला क्षेत्र भी जलमग्न होने लगा है।
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स्कूल नहीं, डूबता बच्चों का भविष्य
मझौवां। बाढ़ से प्रभावित प्रावि सुघरछपरा, प्रावि गोपालपुर और प्रावि उदई छपरा, पीएन इंटर कालेज दूबे छपरा, अमरनाथ मिश्र पीजी कालेज दूबेछपरा, यशोदा देवी बालिका इंटर कालेज दूबेछपरा, प्राथमिक विद्यालय जग छपरा, प्राथमिक विद्यालय मझौवां, महाबीर सिंह इंटर कालेज बादिलपुर, प्रावि हृदयचक, प्रावि बादिलपुर, प्रावि राजपुर, निर्माणाधीन इण्टर कालेज नौरंगा समेत एनएच-31 से दक्षिण स्थित अधिकतर स्कूलों में बाढ़ का पानी 4 से 5 फीट भर चुका है। सभी शिक्षण संस्थान बंद हैं। पढ़ाई की जगह अब बच्चों के हाथों में बर्तन हैं, जो पानी से उबले आलू या सूखा चिउरा मांग रहे हैं।
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राहत की सिर्फ बातें, जमीन पर सन्नाटा
मझौवां। गंगा की बाढ़ से दर्जनों गांव चपेट में है। प्रशासन ने केवल प्रभावित इलाकों में रहने वालों को सुरक्षित स्थान पर चले जाने की अपील की है। मगर वह सुरक्षित जगह है कहां? कोई शरणस्थली नहीं, कोई ठोस व्यवस्था नहीं। लोग सड़कों पर भटक रहे हैं। महिलाएं बच्चों को गोद में उठाकर सहायता की बाट जोह रही हैं पर कोई हाथ नहीं बढ़ता नजर आ रही है। बाढ़ पीड़ित लोग दर-दर की ठोकर खाने पर मजबूर हैं।

बाढ़ से घिरे गांवों में नाव तक की सुविधा नहीं
दयाछपरा। क्षेत्र के ग्राम पंचायत गोपालपुर के उदई छपरा, दुबे छपरा,आलम राय के टोला, दया छपरा के बुधन चक, प्रसाद छपरा, बड़का बुधन चक, पहाड़ गिरी के मठिया व ग्राम पंचायत जगदेव पूर्ण रूप से चारों तरफ बाढ़ से बाढ़ के पानी से घिर गया है। इन गांव के बाशिंदों का राष्ट्रीय राजमार्ग 31 से संपर्क टूट गया है ।फिर भी शासन प्रशासन की तरफ से किसी प्रकार की सुविधा न नाव की व्यवस्था की गई ना कहीं लाइट की। बाढ़ पीड़ितों को सबसे अधिक दिक्कल पीने की पानी की है।

बाढ़ के पानी से घिरे दुबहर थाना परिसर में सीज किए गए वाहन।संवाद

बाढ़ के पानी से घिरे दुबहर थाना परिसर में सीज किए गए वाहन।संवाद

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