जिले में फुं के ट्रांसफारमरों को विभाग द्वारा बदलने की स्थिति और गति ठीक नहीं है। आपूर्ति के लिए लगाए जाने वाले ट्रांसफार्मरों की स्थिति यह है कि एक बार यदि फुंक जाए तो उनके बनने में हफ्तों लग जाते हैं। नगरीय क्षेत्र में तो फुं के ट्रांसफारमर चार-पांच दिनों में बन जाते हैं
लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे ट्रांसफार्मर बनकर दोबारा कब लगेंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता। इतना ही नहीं ट्रांसफार्मरों के रख-रखाव की उचित व्यवस्था नहीं हैं। अवैध कनेक्शन और लोड अधिक होने की वजह से आए दिन ट्रांसफार्मर फुंकते रहते हैं। अब ऐसे में बगैर बिजली के लोगों की होने वाली मुश्किलों को आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 2050 ट्रांसफार्मर लगाए गए है, जिसमें से करीब 100 से अधिक ट्रांसफार्मर जले हुए है। इन जले ट्रांसफार्मरों को बदलकर उनके स्थान पर दूसरा लगाने के लिए 25 ट्रांसफार्मर स्टोर में भेजे जा चुके है। जिसमें 25 केवीए के नौ, 63 केवीए के 11 ट्रांसफार्मर, 100 केवीए के तीन तथा 250 केवीए के दो ट्रांसफार्मर अभी स्टोर के पेंडिंग में हैं। जले ट्रांसफार्मरों को बदलने के लिए विभाग ने एक कंपनी को ठेका दे रखा है।
लेकिन एक वाहन होने के चलते नगरीय इलाकों के ट्रांसफार्मर बदलने में उसे काफी समय लग जाता है, ऐसे में ग्रामीण इलाकों के ट्रांसफार्मर को जिला मुख्यालय तक लाने में उपभोक्ताओं को अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। जबकि शासन का स्पष्ट निर्देश है कि पांच दिनों के भीतर ग्रामीण इलाकों में जले ट्रांसफार्मर बदल दिए जाय। और तो और गांवों में फुुं के ट्रांसफार्मर की जगह कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की जाती है। अब ट्रांसफार्मर हफ्ते भर में बने या पखवाडे़ भर में, लोगों को झेलना ही पड़ता है।