महाराष्ट्र के केंद्रीय आयुद्ध डिपो में कार्यरत फायरमैन शहीद धर्मेंद्र कुमार यादव के परिवार की रोती-बिलखती महिलाएं।
महाराष्ट्र के केंद्रीय आयुद्ध डिपो में कार्यरत फायरमैन शहीद धर्मेंद्र कुमार यादव का तिरंगे में लिपटा शव शनिवार को जैसे ही उसके दरवाजे पर पहुंचा, उनके अंतिम दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। वहीं शव के साथ आए सेना के जवानों ने अंतिम सलामी देकर पुष्प चक्र चढ़ाया। अंत्येष्टि शिवरामपुर घाट पर हुई।
शिवपुर दियर नई बस्ती निवासी कृष्णानंद यादव के तीन पुत्रों और दो पुत्रियों में सबसे बड़ा पुत्र धर्मेंद्र यादव था, जो 2013 में सेना में भर्ती हुआ था। जिसे महाराष्ट्र के वर्धा जिले में स्थित केंद्रीय गोला बारूद भंडार में फायर मैन के पद पर तैनाती मिली। 31 मई को लगी आग को बुझाने में धर्मेंद्र गंभीर रूप से झुलस गया और शहीद हो गया। शहीद धर्मेंद्र के पिता उप्र के पुलिस के उप निरीक्षक पद पर आजमगढ़ पुलिस लाइन में कार्यरत है। धर्मेंद्र की शादी 2006 में सहतवार के रजौली निवासी संजू देवी के साथ हुई थी। जिससे दो पुत्रियां है तथा संजू गर्भवती है। पति के शहीद होने की सूचना पर संजू अपना सुध-बुध खो बैठी और शव से लिपट कर रो रही थी। दुबहर थानाध्यक्ष अतुल कुमार राय ने शव को सलामी दी और पुष्प अर्पित किया। शहीद धर्मेंद्र के अंतिम यात्रा में कई गांवों के लोग श्रीरामपुर घाट पर पहुंचे, जहां नारद राय के प्रतिनिधि बब्लू तिवारी, गोलू राय, प्रधान प्रतिनिधि पिंटू मिश्र, शशिकांत सिंह, राज कुमार पांडेय, भीम चौधरी आदि रहे।
घाट पर पहुंचकर सदर तहसीलदार ने शव को अंतिम सलामी दी। लेकिन जिला प्रशासन के किसी जिम्मेदार अधिकारी के शहीद के घर न पहुंचने पर लोगों को मलाल रहा। शव के पहुंचते ही गांव के प्रधान प्रतिनिधि पिंटू मिश्र ने डीएम और एसपी को कई बार फोन मिलाया। लेकिन दोनों अधिकारियों ने फोन रिसीव नहीं किया। उधर, मंगल पांडेय विचार मंच का प्रतिनिधि मंडल शहीद के शव पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और शहीद के अंतिम यात्रा में श्रीरामपुर घाट पर जाकर परिवारवालों को इस दु:ख की घड़ी में हिम्मत रखने की सलाह दी। प्रतिनिधि मंडल में बब्बन विद्यार्थी, रणजीत सिंह, गणेश जी सिंह, राजू मिश्र, अजय पांडेय आदि मौजूद रहे।