परिवार के लोगों ने पीड़ितों का नेपाल, छपरा और जिला अस्पताल सहित कई नेत्र अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन कहीं राहत नहीं मिली। परिजनों ने बताया कि पीड़ितों को बचपन से ही कम दिखाई देने लगा था। किशोरावस्था आते-आते बीमारी चरम पर पहुंच गई। परिवार के मुखिया जैसे तैसे रिक्शा चलाकर सभी का पालन पोषण करते हैं। अगर रिक्शा लेकर वह शाम को कहीं फंस जाते हैं तो घर पहुंचना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता।
परिजनों ने बताया कि वे सभी सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं। कहा कि विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत्त कराया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। परिवार परेशान है। सरकारी मदद मिले तो जीवन आसान हो जाएगा।
मरीजों को देखने और जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि इतने लोगों की रोशनी कैसे चली गई। जिला अस्पताल में इलाज की बेहतर व्यवस्था है। इलाज हो सकता है। -डॉ. बीपी सिंह, नेत्र चिकित्सक, जिला अस्पताल
मेरे पास कोई भी आवेदन नहीं आया है। सचिव को भेज कर राशन कार्ड, पेंशन व आबास सहित अन्य सरकारी सुविधाएं दिलाने का प्रयास करूंगा। अगर नेत्रहीन हैं तो उनको सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा। -सूर्य प्रकाश, बीडीओ, हनुमानगंज