एक सरकारी कर्मचारी को सेवानिवृत्ति के बाद भी तीन माह तक वेतन दिया गया। जब मामला सामने आया तो अधिकारी उससे रिकवरी की बात कह रहे हैं। जबकि उक्त कर्मचारी को किसी भी तरह की सेवानिवृत्ति का नोटिस नहीं दिया गया था।
चालक को सेवानिवृत्त जून में होना था, लेकिन उसे विभागीय अफसरों ने तीन माह बाद अक्तूबर में सेवानिवृत्त किया है। ऐसा तभी संभव होता है, जब सेवानिवृत्त की अवधि बढ़ाने की संस्तुति राज्यपाल से मिले।
विकास खंड मुरली छपरा में तैनात रहे बीडीओ के चालक को जून 2015 में सेवानिवृत्त होना था, लेकिन उसे रिटायर करना तो दूर उसे रिटायरमेंट का नोटिस तक नहीं दिया गया।
जबकि शासन के मंशानुरूप उसे छह माह पहले ही रिटायरमेंट की तिथि की सूचना दी जानी थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। ऊपर से उससे सितंबर तक काम भी लिया गया। इतना ही नहीं उसे चुनाव की ड्यूटी में लगाया गया है।
मामला प्रकाश में तब आया जब सेवानिवृत्त होने वाले कर्मियों की रिपोर्ट शासन को भेजी जाने लगी। उसी समय यह प्रकाश में आया कि चालक को जून में ही रिटायर होना था।
मामला संज्ञान में आते ही अधिकारियों के हाथपांव फूलने लगे। आननफानन में ब्लाक पर चालक का काम कर रहे कर्मी को 21 अक्तूबर को सेवानिवृत्त का पत्र पकड़ाया गया।
मामले में सीडीओ के बालाजी ने कहा कि वाहन चालक का मामला संज्ञान में आया है। चालक से वेतन रिकवरी के साथ ही दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस प्रकरण में विभागीय जांच बैठा दी गई है।
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