बलिया। जिले की करीब 3,87,036 आबादी को बाढ़ जैसी दैवीय आपदा से बचाने के लिए नदियों के बाढ़ परिक्षेत्र (फ्लड प्लेन जोन) बनाने की कवायद शुरू हो गई है। पहले गंगा नदी में फ्लड प्लेन जोन बनाने का फैसला किया है। इसके तहत कोटवा नारायनपुर से सिताबदियारा तक नदी के किनारे फ्लड प्लेन जोन तय होने के बाद गंगा के किनारों से 100 मीटर की दूरी तक किसी भी तरह का विकास या निर्माण कार्य नहीं किया जा सकेगा।
इसके तहत तकनीकी अध्ययन व सर्वेक्षण के आधार पर जनपद में प्रवाहित गंगा नदी की 104 किमी लंबे परिक्षेत्र में दो सौ मीटर की दूरी पर करीब 520 पिलर लगाए जाएंगे। इस पर करीब आठ से दस करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस कार्य को पूरा करने के लिए मार्च 2026 तक की समय अवधि तय की गई है। जनपदवासियों को बाढ़ की विभीषिका से बचाने के लिए गंगा नदी में बनने वाले फ्लड प्लेन जोन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार गंगा नदी की बाढ़ से 144 गांवों के 91567 लोग प्रभावित होते हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने वर्ष 2017 में पहले चरण हरिद्वार से उन्नाव तथा दूसरे चरण में उन्नाव से बलिया तक गंगा नदी में फ्लड प्लेन जोन बनाने का निर्देश दिया था। पहले चरण कार्य पूरा होने के बाद शासन दूसरे चरण की प्लानिंग का काम एनआईएच (नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रोलॉजी) रुड़की को सौंपा था। एनआइएच ने उन्नाव से बलिया तक के शहरों में बीते 100 वर्षों तक नदी में कहां तक बाढ़ आई और भविष्य में कितना बड़ा क्षेत्र प्रभावित हुआ है, इसका तकनीकी अध्ययन किया। इसके बाद सीमांकित परिक्षेत्र का सर्वेक्षण किया और गंगा नदी के बाढ़ परिक्षेत्र का सीमांकन कर उसके दायरे में आने वाले आबादी क्षेत्र का सर्वे किया और उसके आधार पर सीमांकित बाढ़ परिक्षेत्र का मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत एनआइएच ने लैटीट्यूड और लांगीट्यूड की नो डेवलमेंट जोन और रेग्युलेटरी जोन के तौर पर निशानदेही की गई है।
सरयू नदी में भी बनेगा फ्लड प्लेन जोन
जिसे के उत्तर दिशा में प्रवाहित होने वाली सरयू नदी में भी फ्लड प्लेन जोन बनाने की कवायद आरंभ कर दी गई है। इसके लिए सिंचाई व बाढ़ विभाग को नोडल बनाया गया है। विभाग की ओर से नदी में पिलरों को लगाने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे करने के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट आफ हाइड्रोलॉजी, रुड़की से अनुबंध किया गया है। जिले में करीब 120 किमी लंबा सरयू नदी का प्रवाह है और बाढ़़ के दिनों में नदी की धारा व्यापक धनहानि करती है। जिले में सरयू नदी में बनने वाले फ्लड प्लेन जोन पर करीब 9.48 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरयू नदी में हाईफ्लड से नदी के तटवर्ती करीब 148 से अधिक गांवों के करीब 295469 लोगों को बाढ़ का सामना करना पड़ता है।
क्या हैं फ्लड प्लेन जोन
नदी में फ्लड प्लेन जोन, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र को दर्शाने के लिए चिह्नित क्षेत्र है। यह क्षेत्र नदी के दोनों किनारों के 100 मीटर के भीतर तक फैला होता है, जहां पर कोई भी स्थायी निर्माण प्रतिबंधित होता है। फ्लड प्लेन जोनिंग का उद्देश्य बाढ़ के खतरे को कम करना और नदी के आसपास के क्षेत्र में अवैध निर्माण को रोकना है। फ्लड प्लेन जोनिंग के तहत नदी के किनारों के क्षेत्रों को बाढ़ के खतरे के स्तर के आधार पर चिह्नित कर पिलर लगाए जाते हैं।
लागू हो जाएंगी ये बंदिशें
फ्लड प्लेन जोन में कुछ विशेष प्रकार की निर्माण गतिविधियों और भूमि उपयोग पर प्रतिबंध होते हैं, जिनका उद्देश्य बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करना है। फ्लड प्लेन जोन में बड़े निर्माण कार्य जैसे कि स्थायी संरचनाएं, इमारतों का निर्माण या राजमार्गों के निर्माण पर प्रतिबंध होता है। इसके अलावा कुछ मामलों में कृषि भूमि के उपयोग पर भी प्रतिबंध हो सकता है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां बाढ़ का खतरा अधिक होता है। कुछ क्षेत्रों में विशिष्ट उपयोगों पर प्रतिबंध हो जाएगा। इसके अलावा पेड़ों की कटाई, या अन्य गतिविधियां भी प्रतिबंधित हो जाएंगी।
जिले में गंगा और सरयू नदी में फ्लड प्लेन जोन बनाने की कवायद चल रही है। पहले चरण में गंगा नदी में फ्लड प्लेन जोन बनाया जाएगा। इसके तहत 200 मीटर की दूरी पर पिलर लगाए जाएंगे। यह कार्य मार्च 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसके अलावा सरयू नदी में भी फ्लड प्लेन जोन बनाया जाएगा। इसकी तैयारी चल रही है।
-संजय मिश्रा, अधिशासी अभियंता बाढ़ विभाग, बलिया।