नरहीं। गंगा का जलस्तर बढ़ने से गड़हांचल के तटवर्ती इलाकों में बाढ़ की चिंता अभी से सताने लगी है। बाढ़ आने पर दर्जनों गांव टापू में तब्दील हो जाते हैं और लोगों को अपना घर छोड़ कर ऊंचे स्थानों पर शरण लेना पड़ता है। वहीं मवेशियों के चारे संकट से भी जूझना पड़ता है।
विकास खंड सोहांव के गांवों में गंगा, टोंस और मंगई नदी तीनों एक साथ कहर बरपाती है। गंगा के कटान से तो शाहपुर बभनौली गांव का अस्तित्व ही समाप्त की ओर है। इस गांव के दो सौ से अधिक परिवार पलायन कर चुके हैं और बहुत कम संख्या में लोग अभी भी कटान के मुहाने पर बसे हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने से इनकी धड़कने भी तेज हो जाती है। इस गांव के लोग अभी से सहमे हुए हैं कि कहीं गंगा ने विकराल रूप धारण किया तो कटान का खतरा तो है ही घर भी छोड़ना पड़ सकता है।
बगल के गांव इच्छा चौबे का पूरा के सामने कटान रोकने के लिए ठोकर का निर्माण कार्य चल ही रहा था कि गंगा का जलस्तर बढ़ने से काम रुक गया जिससे गांव के लोगों को चिंता सताने लगी है कि कहीं इस साल भी गंगा का कटान शुरू हुई तो इच्छा चौबे का पूरा गांव भी गंगा के कटान की चपेट में आ सकता है। गंगा का जलस्तर बढ़ने पर इच्छा चौबे का पूरा, शाहपुर बभनौली, बरकंटी, गंगहरा, रैया खाड़ी, बड़काखेत उर्फ पलियाखास, सरवनपुर, कुल्हड़िया, रामगत का डेरा, कोट मझरियां, टेढ़वा के मठिया,सोबंथा नई बस्ती आदि गांवों के लोगों को घर छोड़ कर सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। वहीं उमरपुर दियारे में हजारों की संख्या में गाय, भैंस, घोड़े एवं भेड़ों को दियारे से नाव के सहारे लाना पड़ता है।
गंगा के तटवर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती किसानों द्वारा की जाती है वह भी प्रभावित होती है। यदि गंगा का पानी एनएच 31 सड़क को पार कर गया तो बाढ़ से और अधिक तबाही मचती है। इसको लेकर भी किसानों की चिंताएं बढ़ गई है। हालांकि गंगा का जलस्तर अभी काफी नीचे है लेकिन उत्तराखंड में हो रही लगातार बारिश ने तटवर्ती इलाकों में बेचैनी बढ़ने लगी है।