हत्या के एक मामले में सुनवाई करते हुए एफटीसी द्वितीय बीके लाल की अदालत ने शुक्रवार को हत्या के पांच आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध पाते हुए सभी आरोपियों को आजीवन कारावास तथा पांच-पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। मामला बैरिया थाना क्षेत्र के मीरजापुर गांव का है।
अभियोजन के अनुसार, वादी मुकदमा अखिलेश वर्मा ने दिनांक 17 नवंबर 2007 को बैरिया थाने में मुकदमा दर्ज कराया था कि मेरे पिता शिवशंकर गांव के नन्हक तथा मनोज के खिलाफ एक मुकदमे में गवाह थे। इसी रंजिश को लेकर 16 नवंबर को दिन 10 बजे करीब सुमेश अपने हाथों में रामा लिए हुए तथा मनोज टांगी तथा दिलीप, देवेंद्र सत्यदेव अपने-अपने हाथों में लाठी लिए गाली-गलौज देते हुए दरवाजे पर चढ़ आए। नन्हक ने ललकारते हुए कहा कि इनका करकट गिरा दो और दीवार तोड़ दो, बोले तो मारकर हाथ-पैर भी तोड़ दो। इस पर सभी आरोपी करकट और दीवार गिराने लगे।
पिता शिवशंकर तथा घरवालों के मना करने पर सभी लोगों ने अपने-अपने हाथों में लिए टांगी, रामा और लाठी से मेरे पिताजी के उपर हमला बोल दिया। शोरगुल करते हुए पिताजी अपना बचाव करने लगे। इस दौरान उनकी पत्नी तथा भाभी एवं बहन भी बचाने आई तो उन्हें मारापीटा गया। घायल होने पर शिवशंकर सोनबरसा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से स्थिति गंभीर देख सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान पिता की मृत्यु हो गई। इस मामले में पुलिस ने 147, 148, 304, 323, 504, 427 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया।
पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य का न्यायिक परिसीलन के उपरांत उपरोक्त सभी आरोपियों के खिलाफ दोष साबित पाया। जिस पर सभी को आजीवन तथा अर्थदंड से दंडित किया गया। अभियोजन की ओर से सुधीर कुमार मिश्र तथा बचाव पक्ष से दिनेश तिवारी ने अपना-अपना तर्क प्रस्तुत किया।
इसी मामले के क्रास केस में सुनवाई करते हुए न्यायाधीश बीके लाल ने रामविचार तथा लखन विचार के खिलाफ दोष पाते हुए दो-दो वर्ष के सश्रम कारावास तथा एक-दक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है।