मछुआरों के मुंह से निवाला छीना जा रहा है। कहा कि इन मछुआरों के पास न तो खेत है और न कोई रोजगार का अन्य साधन है। इन लोगों के जीविकोपार्जन का मुख्य स्रोत गंगा से मछली पकड़ना और उसे बाज़ार में बेचकर अपनी जीविका चलाना है। इसे जिला प्रशासन द्वारा नीलामी किया जा रहा है। कहा कि इस देश में गंगा, गाय और गीता को पवित्र माना जाता है तो फिर मां गंगा की नीलामी यहां के अधिकारी कैसे कर सकते हैं।
उन्होंने जिला प्रशासन पर आरोप लगाया कि यहां के अधिकारी भाजपा सरकार को बदनाम करना चाहते हैं, कई बार मछुआरों ने डीएम से गुहार लगाई लेकिन न तो इनकी सुनी जा रही है, न ही इनकी पीड़ा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाई जा रही है। अधिकारियों को सपा मानसिकता का बताया।
सुरेंद्र सिंह ने कहा कि मछुआरे हमारे भाजपा सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद से भी मिलने गए थे, जिनके द्वारा आश्वासन दिया गया की गंगा की नीलामी नहीं होगी। इसके बाद भी जिला प्रशासन ने गंगा की नीलामी कर दी। मंत्री संजय निषाद पर भी हमला करते हुए कहा कि अगर वह चाहते तो यह नीलामी तुरंत रूक सकती है, लेकिन शायद वह भी चाहते हैं कि मां गंगा की नीलामी की जाए।
कहा कि यदि गंगा की नीलामी नहीं रोकी गई तो मैं मछुआरा समाज के 51 युवाओं को साथ लेकर पैदल मुख्यमंत्री से मिलने जाएंगे और मांग करेंगे की जिल के सभी तानाशाह अधिकारियों को तत्काल बर्खास्त किया जाए और मां गंगा की नीलामी को रोका जाए।
मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट से बच्चों ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि ठेकेदार हमें मछली मारने नहीं देते हैं, जिसके कारण हमारे घर में खाने को लाले पड़ गए हैं। हमारे स्कूल की फीस नहीं जमा हो पा रही हैं। वहीं, एक महिला अपनी पीड़ा बताते-बताते रोते हुए बोली कि ना तो मंत्री संजय निषाद हमारी पीड़ा सुनने को तैयार हैं, ना ही यहां के अधिकारी, हम जाएं तो जाएं कहा।