जांच में पाया गया कि कुछ कार्य या तो अधूरे थे अथवा धरातल पर उनका अस्तित्व ही नहीं मिला, जबकि उनके नाम पर भुगतान निकाल लिया गया था। जांच रिपोर्ट में आरआरसी सेंटर निर्माण में सात लाख रुपये तथा अन्य विभिन्न कार्यों में 8.55 लाख रुपये के भुगतान को अनियमित पाया गया।
कुल मिलाकर 15.55 लाख रुपये के सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होने पर संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से स्पष्टीकरण मांगा गया, लेकिन जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।
एफआईआर के अनुसार, अनियमित भुगतान में लगभग 13.52 लाख रुपये की जिम्मेदारी तत्कालीन सचिव/ग्राम विकास अधिकारी मनोज कुमार तथा 2.03 लाख रुपये के भुगतान के लिए तत्कालीन पंचायत सचिव उपेंद्र को जिम्मेदार माना गया है। वहीं तत्कालीन ग्राम प्रधान अनंत देव सिंह यादव को भी मामले में नामजद किया गया है।
उभांव थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद पंचायत विभाग में हड़कंप मच गया है। क्षेत्र में मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी धन के दुरुपयोग और विकास कार्यों में अनियमितता के मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी तथा पुलिस जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जाएगी।