चितबड़ागांव। टोंस नदी पर बन रहा पुल एक बार फिर विवादों में घिर गया है। चितबड़ागांव कस्बे की तरफ बने रहे एप्रोच मार्ग का काम रविवार को ग्रामीणों ने रोकवा दिया। मुआवजे और नक्शे के अनुसार एप्रोच मार्ग नहीं बनाने का आरोप लगाया। सेतु निगम पर मनमानी का आरोप लगाया।
उधर, निर्धारित समय-सीमा बीत जाने के दो साल बाद भी पुल का निर्माण पूरा न होने से लोगों में नाराजगी है। पुल की आधारशिला तत्कालीन राज्यमंत्री चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय एवं उपेंद्र तिवारी ने रखी थी। प्रारंभिक चरण में पुल तथा दूसरी ओर का एप्रोच मार्ग तैयार हो गया था लेकिन चितबड़ागांव कस्बे की तरफ निर्माण के दौरान बिना मुआवजा दिए कार्य शुरू होने पर किसानों ने विरोध जताते हुए काम रोक दिया।
काश्तकारों का आरोप है कि उपजिलाधिकारी सदर एवं सेतु निगम द्वारा सीमांकन के दौरान एप्रोच मार्ग के लिए दोनों तरफ कुल 16 पत्थर गाड़े गए थे, जिन्हें एक काश्तकार द्वारा उखाड़ दिया गया।
किसान अशोक कुमार सिंह ने आरोप लगाया कि टोंस नदी पुल के एप्रोच मार्ग को मुख्य सड़क से जोड़ने के दौरान 11000 केवीए विद्युत तार को जानबूझकर क्रॉस कराया गया, ताकि एक व्यक्ति विशेष की बाउंड्री बचाई जा सके और इसी कारण सड़क को मानक के विपरीत तिरछा किया जा रहा है। काश्तकारों ने जिलाधिकारी बलिया को शिकायती पत्र देकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो वे धरना-प्रदर्शन करेंगे। शिकायतकर्ताओं में धर्मेंद्र सिंह, प्रमोद सिंह, मुकेश सिंह, अजीत वर्मा, श्रीराम वर्मा, रणजीत वर्मा, नन्दलाल वर्मा आदि मौजूद रहे।
उपजिलाधिकारी सदर तिमराज सिंह ने बताया कि सीमांकन कर पत्थर गाड़ा जा चुका है और इन्हीं निशानों के आधार पर कार्य होना है। समस्या आने पर सेतु निगम द्वारा सूचना दिए जाने पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर आरएस राय ने कहा कि सड़क तिरछा करने का मामला एक काश्तकार द्वारा न्यायालय में वाद लंबित रहने के कारण उत्पन्न हुआ है। लोगों का कहना है कि जब भूमि-विवाद न्यायालय में विचाराधीन है तो राजस्व सेतु निगम सीमांकन कर पत्थर कैसे गाड़ सकता है।