भीमपुरा। बेल्थरारोड तहसील क्षेत्र के ग्राम पंचायत खूंटा बहोरवा के मौजा खूंटा में पांच साल से लंबित चल रही चकबंदी प्रक्रिया में किसानों का विरोध देखते हुए बृहस्पतिवार को सीओ चकबंदी चार थानों की पुलिस फोर्स लेकर चकों का सीमांकन करने पहुंचे। किसानों ने जमकर हंगामा करते हुए पैमाइश का विरोध किया। छावनी में तब्दील क्षेत्र को देख किसान पीछे हट गए और न्याय की गुहार लगाते रहे।
खूंटा गांव में गत 2016 से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। चकबंदी अधिकारियों द्वारा भारी अनियमितता की गई है। किसानों का चक एक जगह करने के बजाय चार से पांच भागों में बांट दिया गया है। किसी के बने मकान को भी दूसरे किसानों के नाम से चक काट दिया गया है। खास बात यह है कि इस गांव में करीब एक दर्जनों मृतकों के नाम से चक काट दिया गया है, जिनकी मौत एक दशक पूर्व हो चुकी है। इन समस्याओं को लेकर किसानों ने इसकी सूचना जिलाधिकारी सहित चकबंदी आयुक्त लखनऊ को पत्र के माध्यम से दी थी, लेकिन स्थित ज्यो कि त्यों बनी हुई है। इस मामले के निराकरण के लिए किसानों ने जिलाधिकारी को भी पत्र देकर अवगत कराया। जिलाधिकारी ने बंदोबस्त अधिकारी को आदेशित किया कि किसानों के प्रकरण को स्थलीय परीक्षण कराकर न्याय संगत कार्रवाई करें, लेकिन बंदोबस्त अधिकारी के जिलाधिकारी के आदेश का पालन कराने के बजाय चकबंदी सीओ उमाशंकर सहित चार थानों की फोर्स लेकर सीमांकन के लिए पहुंची। किसान पूरे दिन अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाते रहे और पुलिस फोर्स के बल पर किसानों के चकों का सीमांकन होता रहा और किसान मूकदर्शक बने हुए थे। किसान राममूरत, पतिराम, रघुनाथ ने कहा कि चकबंदी छोटे-छोटे चकों को जोड़ने के लिए की जाती है, लेकिन यहां चकों को जोड़ने के बजाय कई खंडों में बांट दिया गया है। इससे किसानों विवाद बढ़ गया है। इस मामले में सीओ चकबंदी उमाशंकर ने कहा कि मैं किसी समस्या का निराकरण नहीं कर पाऊंगा। मुझे काटे गए चकों का सीमांकन कराने का आदेश मिला है। अगर कोई माहौल बिगाड़ने का प्रयास करेगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इस दौरान ग्राम प्रधान जगरनाथ यादव, नगरा, उभांव, पकड़ी, रसड़ा और मुकामी पुलिस मौजूद रही।