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किसानों को पता नहीं, खेतों में गाड़ दिए लाल झंडे

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रामगढ़ क्षेत्र के खेतों में लाल झंडी गाड़ते बैराज खंड वाराणसी के कर्मचारी। - फोटो : BALLIA
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रामगढ़। द्वाबा को बाढ़ से बचाने के लिए नदी की धारा को मोड़ने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसे लेकर लगातार प्रशासनिक दौरा के बाद अब प्रशासन की ओर से अगले चरण की शुरूआत की गई है। इसके तहत बिना किसानों को सूचना दिए ही उनके खेतों में लाल झंडी गाड़ दिए गए हैं। इसके पहले न तो उन्हें जमीन अधिग्रहण की कोई सूचना दी गई है और न ही मुआवजे को लेेकर कोई बात की गई है। इससे इलाके के किसानों में काफी गुस्सा है और वे भड़के हुए हैं। बैराज खंड वाराणसी की टीम ने नदी की धारा को डायवर्ट करने के लिये खेतों में लाल झंडी लगवाया है। यह इलाका एसडीएम सदर के क्षेत्र में आता है, उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें तो ऐसे किसी चिन्हांकन की सूचना तक नहीं है। यही जवाब जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने भी दिया। ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि आखिर जिला प्रशासन को सूचना दिए बिना कोई टीम काम कैसे कर सकती है और यदि कर भी रही है तो किसानों के खेतों में झंडा आदि कैसे लगा सकती है।
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वर्ष 2019 में आई बाढ़ के दौरान दुबेछपरा में 29 करोड़ रुपये से बना बंधा 16 सितंबर को गंगा की लहरों में बह गया। इसके बाद केहरपुर में बनी पानी टंकी व केहरपुर के दर्जनों मकान भी गंगा में विलीन हो गए। बाढ़ की विभीषिका देखने आए सूबे के मुख्यमंत्री ने दया छपरा में नदी की धारा मोड़ने की बात कही थी। उसी के तहत बाढ़ विभाग ने शासन में 1.19 अरब रुपये का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा। इसके सापेक्ष शासन से 30 करोड़ रुपये स्वीकृत हुआ है। इसके बाद बैराज खंड वाराणसी की टीम ने गंगा नदी के उस पार बुलापुर, दुर्जनपुर, सुघर छपरा, दुबेछपरा, बाबु के टोला, मुरली छपरा, पांडेयपुर मौजा में चिह्नांकन करते हुए लाल झंडी लगा दी है। इस चिह्नाकन को लेकर काश्तकारों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि उनके खेतों में इस तरह की कार्रवाई से पहले विभाग को कम से कम उन्हें सूचना तो देनी चाहिए थी। हमें सूचना दिए बिना ही आखिर बैराज खंड की टीम ने खेतों झंडा आदि गाड़ कर कार्य का खाका कैसे खींच दिया।
काश्तकार प्रेम प्रकाश मिश्रा का कहना है कि सरकार हमारी जमीन को भूमि अधिग्रहण कानून के तहत कार्रवाई करके ले सकती है। हमें कोई आपत्ति भी नहीं होगी, लेकिन इस तरह की कार्रवाई कतई उचित नहीं है। आज ये कह रहे हैं कि केवल चिह्नाकन हो रहा है, कल जमीन पर इसी तरह काम भी शुरू करा देंगे। इनकों पहले जिला प्रशासन से बात करनी चाहिए थी, जिला प्रशासन इलाके के किसानों को इसकी सूचना देता और भविष्य में जमीन अधिग्रहण की जरूरत पड़ने की बात कहता तो किसान जरूर उसकी बात मानते क्योंकि बाढ़ से निजात पाना तो सभी चाहते हैं। गुप्तेश्वर मिश्रा व रणजीत मिश्रा का कहना है कि किसान परिवारों की जीविका के एकमात्र साधन खेत ही हैं। जिला प्रशासन मुआवजा देकर हमारी जमीन अधिग्रहण कर सकती है, अन्यथा इसक हर स्तर पर विरोध किया जाएगा।
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गंगा नदी की धारा को डायवर्ट करने की योजना का प्रस्ताव बनाकर शासन में भेजा गया है। इसके तहत नदी को दो भागों में बांटना है। उसी के तहत गंगा नदी के उस पार मौजा दुरर्जनपुर, बुल्लापुर, सुघर छपरा, दुबे छपरा, बड़े बाबू के टोला, मुरली छपरा, पांडेपुर आदि गांव की जमीन पर झंडी लगाई गई है। मुआवजा देने का काम जिला प्रशासन का है। अगर जिला प्रशासन भूमि उपलब्ध कराता है तो नदी की धारा को मोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
- जीएन शुक्ला, एसडीओ, बैराज खंड वाराणसी
हमें वाराणसी की किसी टीम द्वारा हमारे इलाके में सर्वे या चिह्नाकन के कार्य की कोई सूचना नहीं है। ये कार्य कौन कर रहा है किसकी अनुमति से किया जा रहा है इस संबंध में भी कोई जानकारी नहीं। - अश्वनी कुमार श्रीवास्तव, एसडीएम सदर
वाराणसी की टीम यदि हमारे जिले में कहीं कोई काम कर रही है तो हमें इसकी सूचना देनी चाहिए थी। फिलहाल अभी हमें रामगढ़ इलाके में किसी सर्वे या चिह्नाकन के बारे में कोई सूचना नहीं है और ये कौन करा रहा है इस बारे में भी हम कुछ नहीं कह सकते। - श्रीहरि प्रताप शाही, जिलाधिकारी
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