संयुक्त किसान मोर्चा के केंद्रीय आह्वान पर किसानों ने शनिवार को कलेक्ट्रेट परिसर में कृषि कानूनों की प्रतियां जलाईं। वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार की हठधर्मिता के कारण दिल्ली की सीमा किसान छह माह से डटे हुए हैं। चार सौ से अधिक किसानों की असमय मृत्यु हो चुकी है लेकिन संसद ने किसानों की मौत पर संवेदना के दो शब्द तक नहीं कहा।
किसान सम्मान योजना के नाम पर किसानों को गुमराह जा रहा है। जबकि उर्वरकों का अभाव, महंगा डीजल ने कृषि संकट को और बढ़ा दिया है। बिजली की दर बढ़ाने के लिए सरकार हाथ पांव मार रही है। क़ृषि क्रय केंद्रों की दशा खराब है। विवश किसान अनाज को औने-पौने दाम पर व्यापारियों को बेचने के लिए मजबूर हैं। लचर स्वास्थ्य सेवाओं के कारण कोरोना से व अन्य रोगों से लोगों की जान जा रही है। इस मौके पर जनार्दन सिंह, बलवंत यादव, सत्यनारायण, तेजनारायण, हरेंद्र राजभर, रामकृष्ण यादव, लक्ष्मण पांडेय, रविन्द्र सिंह, शैलेश कुमार सिंह, परमात्मा नन्द राय, ओमप्रकाश सिन्हा, राजू खरवार, मुना खरवार, अरविंद सिंह आदि रहे।