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Ballia News: सेटेलाइट से बचने के लिए रात में पराली जला रहे किसान

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सागरपाली क्षेत्र के नारायनपुर में जलाई गई पराली।संवाद
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बलिया। जिले में पराली जलाने की घटनाएं थम नहीं रही हैं। इसके कारण वायु प्रदूषण और मिट्टी की उर्वरता को नुकसान हो रहा है। कई स्थानों पर सरकारी निर्देशों के बावजूद किसान पराली जला रहे हैं, क्योंकि कटाई के बाद रबी की बोआई के लिए कम समय मिलना और मजदूरों की कमी जैसी समस्याओं से वे परेशान हैं। सेटेलाइट से बचने के चक्कर में किसान ज्यादातर रात में पराली जला रहे हैं। इस पर निगरानी की जा रही है। किसान रात को पराली जलाकर सुबह खेत की जोताई कर दे रहे है। जिले में अब पराली जलाने की 53 घटनाएं हुई हैं। इसमें 24 कूड़े का निकला है। इसकी जांच की जा रही है। पराली जलाने पर पकड़े गए एक किसान पर पांच हजार का जुर्माना लगा है। वहीं, अन्य पर कार्रवाई के लिए संबंधित एसडीएम को कृषि विभाग की तरफ से पत्र लिखा गया है। पिछले साल जिले में 83 पराली जलाने की घटनाएं हुई थीं।
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पराली के चक्कर में जल जा रही फसल

किसानों के अंदर ये सोच है रात में पराली जलाने से सेटेलाइट की पकड़ में नहीं आएंगे। रात में पराली में आग लगने से फसलें भी जल रही हैं। फेफना थाना क्षेत्र के कर्ची नारायनपुर गांव में बृहस्पतिवार की रात पराली जलाने के कारण नारायनपुर निवासी किसान भगवान वर्मा के खेत में लगभग एक बीघा धान की खड़ी फसल जलकर नष्ट हो गई थी। इससे गांव में तनाव की स्थिति बनी हुई है।
फसल के अवशेष हटाए बिना रबी की बोआई संभव

किसानों के पराली जलाने के कई कारण हैं। एक तो धान की कटाई करने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। दूसरी ओर हार्वेस्टिंग के बाद बगैर फसल के अवशेष हटाए बिना रबी की बोआई संभव नहीं है। उप निदेशक कृषि मनीष कुमार सिंह ने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की जैविक संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वायु प्रदूषण का खतरा मंडराने लगता है। फसल के अवशेष जलाने से मृदा का स्वास्थ्य खराब होता है। इसके लिए किसानों के बीच जागरूकता फैलाने की जरूरत है। पर्यावरण प्रदूषण से जलवायु परिवर्तन में अनिश्चिता आ रही है। पराली जलाने से पर्यावरण व वातावरण को नुकसान होता है।
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खेतों में पराली का प्रबंधन ऐसे करें

उप निदेशक कृषि मनीष कुमार सिंह ने बताया कि धान की कटाई के बाद, किसानों को अगली फसल के लिए अपने खेतों की सिंचाई करनी चाहिए। खेतों में पानी और नमी बनाए रखने से पराली 15 दिनों के भीतर सड़ जाएगी और प्राकृतिक खाद में बदल जाएगी। इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होगा, जिससे अगली फसल के लिए कम लागत में अच्छी उपज मिलेगी। हार्वेस्टर से कटाई के बाद, पराली को खेत में जोता जा सकता है। किसान खेतों में पानी देकर और यूरिया का छिड़काव करके भी पराली को सड़ा सकते हैं।
पराली जलाने की घटनाओं पर निगरानी की जा रही है। सैटेलाइट से रिपोर्ट आने पर एसडीएम को कार्रवाई के लिए भेजा जा रहा है। कृषि विभाग के कर्मचारी किसानों को लगातार जागरूक कर रहें हैं। पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। -मनीष कुमार सिंह, उप निदेशक कृषि।
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