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कटानरोधी कार्य में लापरवाही में एक्सईन का तबादला

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बलिया। जिले में चल रहे कटानरोधी बचाव कार्य को लेकर शासन ने सख्त रवैया अपनाना शुरू कर दिया है। करोड़ों खर्च के बाद भी पिछले वर्ष कटान पर अंकुश लगा पाने में असफल साबित हुए एक्सईएन बाढ़ खण्ड एके श्रीवास्तव का शुक्रवार को तबादला कर दिया गया। बृहस्पतिवार को कटान स्थल पर हो रहे कार्यों का जायजा लेने पहुंचे सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने भी एक्सईएन को सलाह दी थी कि यही मौका है, विभाग पर लगे दाग को धो डालिए। बाद में अमर उजाला से बातचीत में भी सांसद ने इशारा किया था, पिछले साल की गलतियों को लेकर सरकार सख्त है और किसी को बख्शा नहीं जाएगा। शुक्रवार को विभागीय कार्रवाई के बाद विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप है। अब बाढ़ खण्ड के नये अधिशासी अभियंता संजय कुमार मिश्र होंगे। इसके पूर्व ये शारदा सहायक खण्ड -28, बाराबंकी की कमान संभाल रहे थे। विभागीय अधिकारियों के अनुसार शनिवार तक इनके कार्यभार ग्रहण के लेने का अनुमान है।
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उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष गंगा व घाघरा ने जिले में भारी तबाही मचायी थी। आलम यह रहा कि दूबेछपरा रिंग बंधे पर चार वर्षों के बीच 39 करोड़ के किये गये बचाव कार्य को बचाने में ही विभाग को सरकारी खजाने से करोड़ों खर्च करने पड़े। इसके बाद भी बंधे को बचाया नहीं जा सका। कमोबेश यही स्थिति घाघरा के जेपी नगर के पास अठगांवा के बचाव कार्य की भी हुई। बचाव कार्य में यहां विभाग करीब 22 करोड़ की लागत से एक टी-स्पर से लगायत बोल्डर व बालू भरी इसी बैग से प्लेटफार्म व पिचिंग का कार्य कराया। यहां पर भी विभाग को अपने द्वारा कराये गये बचाव कार्य को बचाने में ही पसीने बहाने पड़े। इसके बाद भी रक्षा नहीं हो पायी। अनियमितता का आलम यह है कि पूर्व के किये गये 22 करोड़ से अधिक की लागत के धराशायी कार्य की मरम्मत के लिये पुन: शासन को करीब 8 करोड़ की धनराशि जारी करनी पड़ी। इसके बाद बाढ़ खण्ड की जमकर किरकिरी हुयी। जिसे मुख्यमंत्री ने निरीक्षण के दौरान खुद अपनी आंखों से देखा और महसूस भी किया।
जांच हो तो कई के फंसने के हैं आसार
बीते वर्षों के बीच कराये गये बचाव कार्य की अगर ईमानदारीपूर्वक जांच करायी जाय तो कितनों पर ही गाज गिरनी तय मानी जा रही है। अफसोस, जांच कराए जाने के दावे तो जिम्मेदार कई बार किए लेकिन उन पर अमल आज तक नहीं हो पाया। यही नहीं, पूर्व की जांच के आदेश भी ठंडे बस्ते में हैं।
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