विद्युत मजदूर पंचायत जिला कमेटी की बैठक हाइडिल कालोनी में शुक्रवार को हुई। इसमें वक्ताओं ने विभागीय भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार किया। कहा कि विभागीय उदासीनता के चलते हर तरफ स्थिति लचर हो गई है। लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर नाराजगी जताते हुए रिहाई की मांग की गई। मांगें नहीं माने जाने पर कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी।
संगठन अध्यक्ष वीर बहादुर सिंह ने कहा कि पावर कारपोरेशन में ज्यादा भ्रष्टाचार का बोलबाला है। कर्मचारियों की भारी कमी के कारण विद्युत व्यवस्था चरमरा गई है। जैसे-तैसे प्राइवेट कर्मचारियों को रखकर विभाग की खस्ता हालत पर चादर ओढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। यह काम लगभग 13 वर्षों से चल रहा है। इसमें आला अधिकारी पूरी तरह से लिप्त हैं। इन्हीं मांगोें को लेकर चार चरणों में आंदोलन की रूप रेखा तैयार की गई है।
आंदोलन के अंतिम चरण में दस फरवरी को शक्ति भवन लखनऊ से विधान सभा मार्ग पर धरना प्रदर्शन किया गया था। कर्मचारियों की एकजुटता से प्रशासन की हालत खराब हो गई। शक्तिभवन मार्ग पर काफी देर तक जाम लगा रहा। इसे हटाने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज किया। करीब 156 कर्मचारियों को मारपीट कर जेल में बंद कर दिया गया, जिन्हें अब तक नहीं छोड़ा गया है। इसकी घोर निंदा करते हुए कर्मचारियों ने ऐलान किया कि जेल में बंद कर्मचारियों तथा प्रांतीय संघर्ष समिति के नेताओं को नहीं छोड़ा गया तो 24, 25 फरवरी को समस्त विद्युत कार्य बहिष्कार करेंगे।
वीएस पांडेय, अरूण सिंह, सुनील सिंह ,संतोष यादव, बैरिस्टर पांडेय, सत्येंद्र कुमार, अरविंद सिंह, रामाशीष, सुरेश, परशुराम गुप्ता, कमला यादव, दिनेश सिंह, एसपी सिंह, गजेंद्र सिंह, राम बहादुर, दीनानाथ मिश्र, संतोष ओझा, मुन्ना जुबेर आदि उपस्थित रहे।