जनपद के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों के सांसद तथा आम लोगों ने विभिन्न एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की मांग करते हुए पत्रक केंद्रीय रेलमंत्री सुरेश प्रभु तथा रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को सौंपा।
इसका जवाब रेल राज्यमंत्री ने अपने भाषण के दौरान कहानी सुनाकर दिया। बताया कि एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव बढ़ाया जाता है तो संचालन प्रभावित होगा। इससे जनता को ही असुविधा होगी।
सिन्हा ने कहा कि अक्सर यह मांग जनता द्वारा की जाती है कि कसबा बड़ा है, ट्रेनें रुकनी चाहिए। लेकिन शायद उनको यह पता नहीं कि जब हर स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों को रोका जाए तो ट्रेनों का संचालन प्रभावित होगा।
इसका खामियाजा अंतत: आम जनता को ही भुगतना पड़ेगा। कहा कि एक एक्सप्रेस ट्रेन के एक स्टेशन पर ठहराव में सात मिनट का अलग से नुकसान होता है। ऐेसे में ट्रेनों का ठहराव बढ़ाने से रेल संचालन अव्यवस्थित होगा।
एक्सप्रेस ट्रेनों का ज्यादा स्टेशनों पर ठहराव का ही परिणाम है कि 110 से 100 किमी. की गति से चलने वाले राजधानी एक्सप्रेस की औसत गति 65 किमी. की है। मालगाड़ी की औसत गति 20 किमी. की है। कहा कि लोगों को अपनी छोटी मानसिकता बदलनी पड़ेगी।
जन सुविधाओं के लिए नार्थ-ईस्ट रेलवे क्षेत्र में 20 से 22 डीएमयू (पैसेंजर) ट्रेनों को चलाया जाएगा। ताकि लोग जिला मुख्यालय तक आसानी से यात्रा कर सकें।