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जिला अस्पताल में बुखार की भी दवा नहीं

Tue, 04 Apr 2017 10:32 PM IST
ballia
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सांकेतिक चित्र
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लोगों में स्वास्थ्य सुविधाएं सुधरने की उम्मीदें दम तोड़ती जा रही है। नई सरकार के गठन के एक पखवारे बाद भी जिला अस्पताल अभी तक पुराने ढर्रे पर ही चल रहा है। अस्पताल में शुद्ध पेयजल और गंदगी की परेशानी तो थी ही लेकिन उससे भी बड़ी नई समस्या अब ये पैदा हो गई है कि यहां साधारण दवाओं तक का भी टोटा हो गया है। खासतौर पर बच्चों की दवाएं ही नहीं हैं। अस्पताल में दवाओं का अभाव होने के बावजूद प्रशासन मानने को तैयार नहीं है।
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गर्मी शुरू होने के साथ ही जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। एक हजार से लेकर 1500 तक औसतन मरीज प्रतिदिन यहां आ रहे हैं। गरीब मरीजों की सुविधाओं को लेकर जिला प्रशासन लाख दावे कर रहा है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। अस्पताल में इन दिनों दवाओं का टोटा हो गया है, ऐसे में मरीजों को बाहर से दवा लेना मजबूरी हो गई है।

 वहीं चिकित्सा कर्मियों की माने तो बच्चों के लिए पैरासिटामाल सिरप, डाइक्लोपारा, आई ड्राप, ईयर ड्राप, दर्द की दवा नहीं है। इसके अलावा बच्चों के हाथ में लगने वाला वेनीफ्लाम अस्पताल में चार साल से नहीं है। अस्पताल में जरूरी दवा उपलब्‍ध नहीं होने की वजह से मरीजों को बाहर से खरीदना पड़ता है। जिला अस्पताल में दवाओं का अभाव होने के कारण मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें मामूली मर्ज की दवा के लिए भी बाहर के दूकानों पर जाना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में जरूरी स्वास्‍थ्‍य सुविधाएं नहीं होने से लोगों में नाराजगी है।
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ऐसे बोलती है सत्ता की हनकःबलिया। मरीज को देखने गए राज्यमंत्री उपेंद्र तिवारी के भाई कमलेश तिवारी जिला अस्पताल में गंदगी देखकर भड़क गए। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को बुलाकर इमरजेंसी के बाहर खड़ी निजी एंबुलेंस से लेकर वार्ड में गंदगी तक दिखाई। राज्यमंत्री के भाई के मुआयना करने की सूचना से अस्पताल मेें अफरा तफरी मच गई। कमलेश ने सीएमएस से कहा कि जब जिला अस्पताल में ऐसी दुर्व्यवस्था और गंदगी है तो मरीज कैसे स्वस्थ होंगे। सीएमएस डा. जीसी मौर्या ने उन्हें भरोसा दिलाया कि जल्दी ही सफाई के साथ-साथ अन्य व्यवस्थाएं भी दुरुस्त कर ली जाएंगी।हालांकि बाद में अस्पताल के निरीक्षण के बाबत पूछे जाने पर कमलेश तिवारी ने सफाई दी कि वह निरीक्षण करने नहीं, अस्पताल में भर्ती एक परिचित को देखने गए थे। वहां गंदगी और अव्यवस्था देखी तो सीएमएस का केवल ध्यान आकृष्ट कराया था। सीएमएस ने भी कहा कि राज्यमंत्री के भाई ने निरीक्षण नहीं, केवल कुछ कमियों की ओर इंगित किया था।
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