केंद्र सरकार की जल परिवहन योजना एक वर्ष बाद भी साकार नहीं हो सका है। जिले में पहला जेटी एक वर्ष पहले उजियार घाट सरयां गंगा तट और हुकुम छपरा घाट पर स्थापित किया गया।
जिससे जल परिवहन में आने जाने वाले मालवाहक जहाजों एवं क्रूज को जेटी पर रोका जा सके और इसके सहारे सैलानी आसानी से उतर सकें। 11 माह पहले वाराणसी से चला क्रूज भी यहां नहीं रुका था। अब यह जेटी शोपीस बन कर रह गए हैं। इसका उपयोग लोग सैर सपाटे व स्नान करने वाले युवा उछल कूद के लिए कर रहे हैं।
इसके अलावा प्राइवेट स्टीमर का संचालन यहां से हो रहा है। भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, पत्तन पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की ओर से जलमार्ग विकास परियोजना के तहत मालवाहक जहाजों, वातानुकूलित क्रूज को कोलकाता से वाराणसी तक गंगा नदी में चलाने के लिए जगह जगह गंगा घाटों पर जेटी स्थापित किया गया है।
इसके तहत जिले में सबसे पहले उजियार गांव के सामने सरयां गंगा तट व मझौवां गांव के सामने गंगा घाट पर जेटी स्थापित किया गया। इसके माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कोलकाता से वाराणसी तक वातानुकूलित क्रूज सेवा शुरू की गई। गंगा विलास क्रूज को प्रधानमंत्री ने वाराणसी से हरी झंडी दिखाकर डिब्रूगढ़ के लिए रवाना किया था।
बीते जनवरी माह में वाराणसी से डिब्रूघाट के लिए गंगा विलास क्रूज रवाना हुआ लेकिन यह भी उजियार व मझौवां गांव के सामने गंगा घाट पर बने जेटी पर नहीं रुका। इसके बाद से यह जेटी शोपीस बन रह गया है। आलम यह है कि गंगा के तटवर्ती गांवों के लोग इस जेटी का उपयोग सैर सपाटे के लिए करने लगे हैं। जेटी के माध्यम से गंगा तट से काफी अंदर तक लोगों को पहुंचने का मौका मिल रहा है। वहीं युवा वर्ग जेटी का उपयोग छलांग लगाकर गंगा में स्नान के लिए कर रहे हैं।
एक वर्ष में एक भी मालवाहक जहाज नहीं गुजरा
गंगा नदी में वाराणसी से हल्दिया तक विकसित हो रहे राष्ट्रीय जलमार्ग नंबर एक के बीच जनपद को उम्मीद था कि यहां जल परिवहन का हब बनेगा। शुरुआत में कुल चार स्थानों सरायकोटा, उजियार, कंसपुर व मझौवा घाट पर जेटी स्थापित करने को लेकर कवायद शुरु हुई। लेकिन केवल दो स्थानों पर जेटी स्थापित हुआ। उम्मीद थी कि जलमार्ग से होकर गुजरने वाले मालवाहक जहाज यहां रुक सकेंगे और उन पर सामान उतारने व चढ़ाने का काम किया जा सकेगा। इससे कोलकाता से होने वाले व्यापार आदि पर सीधे असर पड़ेगा। जल परिवहन से जुड़ने के बाद इसका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा। किसान सब्जी व अपने अन्य उत्पाद सीधे वाराणसी भेज सकेंगे। जहाजों का आवागमन शुरू होने के बाद किसी भी सामान की ढुलाई सड़क मार्ग की अपेक्षा काफी सस्ती व सुविधाजनक होगी। लेकिन बीते एक वर्ष में एक भी मालवाहक जहाज का आना-जाना नहीं हुआ।
क्रूज के लिए बना जेटी का उपयोग स्टीमर संचालन में
नरही। गंगा नदी में जल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए उजियार घाट गंगा तट पर स्थापित जेट्टी से स्टीमर के यात्री बक्सर से उजियार और उजियार से बक्सर आने जाने में कर रहे हैं। बता दें कि बीते 28 अगस्त को वाराणसी से कोलकाता होते हुए डिब्रूगढ़ के लिए राजमहल क्रूज यहां से गुजरा लेकिन इस जेट्टी पर नहीं रूका। इसके पूर्व14 जनवरी को गंगा विलास क्रूज बक्सर के बंगला घाट पर रूका लेकिन उजियार गंगा तट स्थित जेटी पर नहीं रूका। इसके बाद से ही क्रूज का संचालन बंद था। उजियार गंगा तट पर स्थापित जेटी निजी स्टीमर के संचालन में काम आ रहा है। जेटी स्थापित होने के वक्त सैलानियों के आने जाने के लिए रास्ते का निर्माण कराया गया था लेकिन वह भी अब ध्वस्त हो चुके हैं।