फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ballia News: बैंक से 13 साल बाद भी नहीं मिला ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र

विज्ञापन
विज्ञापन
बलिया। बैंक की लापरवाही का आलम यह है कि उपभोक्ता को 13 साल बाद भी ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया। इस मामले में न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष ने बैंक को ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र जारी करने का आदेश भी दिया है। साथ ही वाद व्यय और मानसिक पीड़ा के मद में 20,000 रुपये देने का आदेश है।
विज्ञापन

बैंक की ओर से डिमांड नोटिस भेजने के बाद 2013 में उपभोक्ता सर्वानन्द ने वाद दाखिल किया। परिवादी की ओर से विपक्षी शाखा प्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक कृषि तिखमपर के विरुद्ध वाद दाखिल किया गया।मांग की कि विपक्षी को हिदायत दी जाए कि परिवादी को उक्त खाते का ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र अविलंब प्रदान किया जाए। बैंक की ओर से 3593 रुपये की वसूली नोटिस देने से उत्पन्न मानसिक कष्ट के लिए भी 10,000 रुपये व परिवाद व्यय व शारीरिक कष्ट के लिए 10,000 रुपये विपक्षी से दिलाने की मांग की।
दाखिल वाद में परिवादी ने बताया कि मेरा किसान क्रेडिट कार्ड खाता वर्ष 2006 में स्टेट बैंक कृषि शाखा में 13 दिसंबर 2006 को खोला गया। जिसमें 45,000 रुपये का ऋण स्वीकृत हुआ। परिवादी ने उस धनराशि का उपयोग नहीं किया। इसके बावजूद बैंक की ओर से चार जून 2013 को 3599 रुपये की डिमांड नोटिस जारी कर दिया गया।
विज्ञापन

पीड़ित ने कहा कि परिवादी एक लघु सीमांत किसान है। उसे वर्ष 2008 की ऋण राहत योजना का लाभ मिलना चाहिए। खाते के क्लोज का नो ड्यूज सर्टिफिकेट परिवादी को प्रदान किया जाना चाहिए था। जिसे बैंक ने प्रदान नहीं किया। इस मामले में न्यायालय के आदेश क्रियान्वयन की 45 दिन की अवधि भी समाप्त हो गई है।


बैंक ने नहीं किया आदेश का क्रियान्वयन : परिवादी सर्वानन्द का कहना है कि वर्ष 2008 में सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड का ऋण माफ कर दिया था और उसने उस ऋण के धन का उपयोग भी नहीं किया था। इसके बाद भी बैंक ने उसे डिमांड नोटिस भेजा था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें