रोजगार सेवकों की मानदेय से ईपीएफ की कटौती पिछले चार वर्षों से की जा रही है। हर महीने कट रही 16.35 लाख की धनराशि किस खाते में जमा हो रहा है किसी भी रोजगार सेवक को जानकारी नहीं मिल रही। सीडीओ के निर्देश पर अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू की है। जिला विकास कार्यालय के लेखाकार ने सभी बीडीओ से इसका ब्योरा मांगा है।
रोजगार सेवकों के मानदेय से ईपीएफ की कटौती 2018 से की जा रही है। हालांकि शुरुआत में 12 फीसदी ईपीएफ कटौती की जा रही थी लेकिन बाद में 25 फीसदी की कटौती शुरु की गई। ईपीएफ कटौती की धनराशि किस खाते में जमा हो रहा है इसको लेकर कई बार रोजगार सेवकों ने आवाज उठाई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। दो दिन पहले रोजगार सेवकों ने इस मामले से अवगत कराते हुए बताया कि प्रतिमाह के हिसाब से रोजगार सेवकों से ईपीएफ की कटौती तो की जा रही है लेकिन रोजगार सेवकों को कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। सीडीओ प्रवीण वर्मा ने इस मामले में अधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके बाद अधिकारी हरकत में आए और इसकी छानबीन शुरु कर दी है। जिला विकास अधिकारी कार्यालय के सहायक लेखाधिकारी ने सभी ब्लॉकों के बीडीओ को पत्र जारी किया है। बताया कि रोजगार सेवकों के अप्रैल 2018 से उनके मानदेय से हो रही कटौती को किस खाते में संरक्षित किया गया है, इसका साक्ष्य सहित पूरा ब्योरा उपलब्ध कराएं। बता दें कि जिले में कुल 654 रोजगार सेवक कार्यरत हैं और इनके मानदेय प्रतिमाह 2500 रुपये के हिसाब से ईपीएफ की कटौती की जाती है।
इस बाबत जिला विकास अधिकारी राजित राम मिश्र ने बताया कि सभी बीडीओ से जानकारी मांगी गई है। जल्द ही रोजगार सेवकों को जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।