बेल्थरारोड। श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में चल रहे लीला मंचन में दशरथ मरण और भरत मनावन की मार्मिक प्रस्तुति की गई। राम वन गमन के बाद अयोध्या में उदासी छा गई। राम के वियोग में दशरथ की तबीयत बिगड़ने लगी। राम- राम कह कर दशरथ बेहोश हो जाते थे। इस दौरान मंत्री सुमंत अयोध्या आए और दशरथ से कहा कि महाराज ! राम ने अयोध्या वापस लौटने से मना कर दिया ।
यह सुनकर दशरथ पर वज्रपात- सा हो गया और वे राम- राम कह कर प्राण त्याग दिए। दशरथ का निधन होने के बाद अयोध्या में शोक की लहर दौड़ गई। नैनिहाल से भरत व शत्रुघ्न को अयोध्या बुलाया गया। पिता के निधन की खबर से भरत बेसुध हो गए। भरत ने दशरथ मरण और राम वन गमन के लिए अपनी माता कैकेयी तथा दासी मंथरा को जिम्मेदार ठहराते हुए जमकर खरी-खोटी सुनाई तथा राम को मनाने वन को चल दिए। पिता के वचन का हवाला देकर राम ने अयोध्या वापस लौटने से इनकार कर दिया। भरत मनावन का भावुक दृश्य देख लीला प्रेमियों की आंखें नम हो गई। अयोध्या के राज सिंहासन पर भरत ाम की खड़ाऊ रख राज पाठ करने लगे। इस बीच राम के जयकारे से वायुमंडल गूंज उठा। लीला मंचन में बृजकिशोर आजाद, राजेंद्र मद्धेशिया, सुरेश शर्मा, विनय प्रकाश डेविड, बिपिन बिहारी पांडेय, दयानंद वर्मा, केके मिश्र का सहयोग रहा।