थाना क्षेत्र के विशुनपुरा ग्रामसभा के कुआं पीपर मौजा स्थित तीन परिवार की आठ रिहायशी झोपड़ियां शुक्रवार की रात जल गईं। इसमें भेड़ों के 53 बच्चे, एक बकरी और एक बछड़े की झुलसने से मौत हो गई। जबकि हजारों रुपये का आलू तथा अन्य सामान जलकर राख हो गया। सूचना के बावजूद दमकल कर्मी मौके पर नहीं पहुंचे। ग्रामीणों के घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
कुआं पिपर मौजा के पाल बिरादरी के डेरा से सभी पुरुष कहीं चले गए थे। अचानक वीरेंद्र पाल की झोपड़ी में आग की लपटें दिखाई पड़ीं। अभी लोग कुछ समझ पाते, तब तक उक्त स्थान पर स्थित पन्नालाल, राजन आदि की आठ झोपड़ियां तथा भूसा सहित तीन खोप आग की लपटों के आगोश में आ गए। ग्रामीणों ने एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
घटना में वीरेंद्र पाल के पांच भेड़ों के बच्चे, गाय का बछड़ा, एक बकरी, पन्नालाल की छह भेड़ के बच्चे, अक्षय पाल के 13, यज्ञनारायण के 15, पारस पाल के नौ, राजन के भेड़ के पांच बच्चे झुलसकर मर गए। साथ ही 70 कुंतल आलू, डेढ़ कुंतल ऊन, उर्वरक, बिस्तर, घर गृहस्थी के सारे सामान जल कर राख हो गए। दरअसल पाल बिरादरी के लोग चार दिन से लेकर एक महीने तक के भेड़ के बच्चे को रस्सी में बांधकर झोपड़ियों में छोड़ देते हैं तथा भेड़ों को चराने के लिए अन्यत्र ले जाया करते हैं।
अग्निकांड के बाद पहुंचे पूर्व विधायक शिवशंकर चौहान, जिला पंचायत सदस्य राणा प्रताप यादव, प्रधान प्रतिनिधि विनय राजभर ने पीड़ितों को घटना स्थल पर पहुंचकर हर प्रकार से मदद का भरोसा दिया।