सूत्रों के अनुसार, हरेराम यादव पहले मेडिकल स्टोर चलाता था। उसके तीन बेटों में से दो आयुष्मान योजना में बतौर कर्मचारी कार्यरत हैं। बड़ा बेटा सुजीत रांची (झारखंड) में नाैकरी करता है, दूसरा अंजनी (अरुण) पड़ोसी जनपद मऊ में कार्यरत है। तीसरा बेटा राहुल बड़े भाई के साथ रांची में रहता है।
शुक्रवार की सुबह टीम ने हरेराम यादव, उनकी पत्नी राजदेई देवी और बहू प्रीति यादव से पूछताछ की। टीम चेकबुक, तीन बैंकों के पासबुक व आयुष्मान कार्ड से जुड़े दस्तावेज अपने साथ ले गई। इस दौरान सहायक प्रवर्तन अधिकारी विनय कुमार द्विवेदी, बैंक ऑफ बड़ौदा बलिया के आशुतोष कुमार खत्री और मनीष कुमार गुप्ता के अलावा सीआरपीएफ के दरोगा अवध नारायण चौहान व ओमप्रकाश आदि मौजूद रहे।
चर्चाओं का बाजार रहा गर्म
बलिया में ईडी के छापे के बाद कई तरह चर्चाएं होती रहीं। पूरे दिन लोगों की निगाह कार्रवाई वाले मकान और दुकान पर लगी रही। अंदर और बाहर जाने वाले लोगों से बातचीत की कोशिश करते रहे, मगर उनको किसी तरह की जानकारी नहीं मिल पाई। टीम के सदस्य कुछ भी बोलने से बचते रहे।
जिले में ईडी की यह पहली कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय की यह जिले में पहली कार्रवाई थी। हालांकि भ्रष्टाचार से संबंधित कई मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कभी करवाई नहीं की गई। लगातार 12 घंटे तक बंद कमरे में परिवार के प्रत्येक सदस्य से पूछताछ करना, डिजिटल और भौतिक साक्ष्य इकट्ठा करने की बात सामने आने के बाद लोग इसे बड़ा घोटाला मान रहे हैं।
हालांकि सुजीत के पिता हरेराम यादव द्वारा बार-बार यह दलील दी जा रही थी, यह क्यों और किस लिए आए थे, पता नहीं है। हरेराम ने यह स्वीकार किया कि जांच के दौरान विभिन्न सवाल टीम के सदस्यों ने किए। जितना पता था, उनका जवाब दिया गया।
कार्रवाई की आंच अन्य लोगों तक पहुंच सकती है
प्रवर्तन निदेशालय के छापे की खबर क्षेत्र में जंगल की आग की तरह फैल गई। मकान के चारों ओर लोगों का जमघट लग गया। टीम के रवाना होने तक लाेग डटे रहे। वहीं, इस कार्रवाई से अवैध धंधे में संलिप्त लोगों में हड़कंप मच रहा। आशंका जताई जा रही है कि इस कार्रवाई की आंच अन्य लोगों तक भी पहुंच सकती है। आने वाले दिनों में और लोग सामने आ सकते हैं।