बलिया। गर्भावस्था में महिलाओं की ठीक से देखभाल न होने और पौष्टिक आहार न मिलने का खामियाजा गर्भ में पल रहे शिशुओं को भुगतना पड़ रहा है। जन्म लेने वाले बच्चों का वजन मानक से बहुत कम है। हाल यह है कि 1500-2400 ग्राम वजन के बच्चे जन्म ले रहे हैं। इन बच्चों को तत्काल एसएनसीयू वार्ड में निगरानी की जरूरत होती है, अन्यथा कई बीमारियों के चपेट में आने से जान पर बन जाती है।
जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2024 से मार्च 2025 तक 2381 से अधिक बच्चों को भर्ती करने की जरूरत पड़ी। इसमें 1326 से अधिक बच्चे कम वजन के मिले। इसमें महिला अस्पताल में जन्म लेने वाले के अलावा पूरे जनपद से आने वाले बच्चे शामिल रहे। डॉक्टर औसत वजन 2.5 से 2.8 किलो के बीच मानते हैं, जबकि इन बच्चों का वजन 2.5 किलो से भी कम रहा।
इनमें से 338 का वजन 2.5 किलो से कम रहा। इन बच्चों को कंगारू मदर केयर (केएमसी) व कुछ को एनआईसीयू व एसएनसीयू में निगरानी के लिए रखना पड़ा। कई दिनों तक इलाज करना पड़ रहा है। बच्चों के कम वजन होने के पीछे डॉक्टरों का मानना है कि आयरन की कमी सबसे बड़ा कारण है। इसके अलावा महिलाओं में हाइपरटेंशन, गर्भावस्था के अंत तक उल्टी की समस्या बने रहना, फाइबर युक्त आहार न लेना शिशु को कमजोर बना रहा है। यह हाल तब है, जब सरकार की ओर से गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, ताकत की दवा और बाल विकास विभाग की ओर से पोषाहार दिया जा रहा है। उनकी नियमित देखरेख की जा रही है। अगर सब कुछ सही चल रहा है, नियमित जांच और पोषक तत्व मिल रहा है तो यह समस्या क्यों हो रही है। यह बड़ा सवाल है। ऐसे में जच्चा और बच्चा दोनों की सुरक्षा और स्वास्थ्य बेहतर रहे, इसके लिए बच्चे के गर्भ में आते ही खुद देखभाल करने की जरूरत है।