ड्रेजिंग कार्य का हुआ शुभारंभ।
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जानकारों की माने तो बाढ़ आने में गिने-चुने मात्र 30 दिन शेष बचे हैं। ऐसे में मानक के अनुरूप काम कैसे पूरा होगा यह आने वाला भविष्य ही बताएगा। लोगो में यह चर्चा है कि यदि नदी की धारा वाले ही प्रोजेक्ट पर काम करना था तो दुबे छपरा में 9 करोड़ रुपया नौरंगा में 10 करोड़ और गंगापुर में सात करोड़ रुपए खर्च करने का क्या मतलब था। इसी परियोजना को समय से पहले स्वीकृति मिल जाती और समय रहते काम पूरा हो जाता तो लोगों को बाढ़ का स्थाई निदान मिल जाता।
जमीन का मुआवजा या जमीन के बदले में जमीन दिलाने की मांग
गंगा नदी के उस पार मौजा पचरुखिया, दुर्जनपुर, पांडेयपुर बुल्लापुर के काश्तकारों ने क्षेत्रीय विधायक को मांग पत्र सौंपा। उन्होंने कहा कि हम अपनी जमीनें देने को तैयार हैं, लेकिन मानक के अनुरूप हमें जमीन के बदले जमीन या उसका मुआवजा शासन-प्रशासन से दिलवाया जाए। क्षेत्रीय विधायक ने किसानों को आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री मंत्री को मामले से अवगत कराएंगे। इसके बाद काश्तकारों ने पत्रक बैराज खंड वाराणसी के अधिशासी अभियंता टीएन सिंह को सौंपा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मांगों को जिलाधिकारी के समक्ष रखा जाएगा।