जिले में अवर्षण के चलते खरीफ की फसलों पर संकट आ गया है। अब जल्दी और पर्याप्त बारिश ही धान तथा मक्का की फसल को बचा सकती है। जिले के अधिकांश हिस्सों में सूखे जैसे हालात हो गए हैं। पीली पड़ चुकीं धान और मक्का की फसलों को देखकर किसानों का कलेजा बैठा जा रहा है।
सिंचाई के साधन वाले किसानों के लिए भी धान की फसल तैयार करना मुश्किल दिख रहा है। अगर किसी तरह धान की फसल हो भी जाती है तो पैदावार बेहद खराब होगी। अब मौसम पर ही निर्भर करता है कि पिछली रबी की बर्बाद फसल की भरपाई खरीफ की खेती से होती है या अन्नदाताओं को दोहरा नुकसान सहना पड़ता है।
जिले की अधिकांश खेती वर्षा पर ही निर्भर है लेकिन कमजोर मानसून का असर खरीफ की पैदावार पर दिखना शुरू हो गया है। सैकड़ों किसान डीजल से सिंचाई कर धान की फसल को बचाने में लगे हैं। बारिश नहीं होने के चलते धान व मक्का की खेती पूरी तरह प्रभावित है।
गुरुवार व शुक्रवार को मामूली बूंदाबांदी से किसानों को कोई फायदा नहीं पहुंचा। कुल मिलाकर रबी के बाद खरीफ की खेती बर्बाद होती है तो किसानों को दोहरा नुकसान होगा। ऐसे में किसान खून के आंसू रोने पर मजबूर हैं। उधर सिंचाई विभाग भी किसानों का कष्ट बढ़ाने में लगा है।
नहरों में पानी न होने से किनारे के खेत तक सूख रहे हैं। प्रकृति की मार झेल रहे किसानों को नहर और सरकारी ट्यूबवेल से भी कोई सहयोग नहीं मिल पा रहा है। ऐेसे में किसान भगवान भरोसे हैं। अगर दो-चार दिन के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ की फसलें बर्बाद हो जाएंगी।
सबसे खराब हालत तो ऊंचाई पर खेती करने वाले किसानों की है। उनकी खेती पूरी तरह बारिश पर ही निर्भर रहती है। बारिश नहीं हुई तो खेती की लागत भी बेेकार जाएगी।