बलिया। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में कम आने वाले छात्र-छात्राओं को निराश नहीं होना चाहिए बल्कि लक्ष्य को पाने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्हें सफलता जरूर मिलेगी। यह कहना है उन लोगों की जो हाईस्कूल, इंटर और स्नातक-स्नातकोत्तर में कम अंक आने के बाद भी मेहनत कर सफलता हासिल की और जीवन पथ पर सफल रहे।
हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परिणाम आने के बाद तमाम छात्र-छात्राओं को कम अंक मिले हैं जिससे उनमें निराशा और अवसाद की भावना है। शिक्षा में मायने अंक का नहीं विषयपरक योग्यता का है जिसके बल ही कामयाबी पायी जा सकती है। ऐसे में इस तरह के विद्यार्थियों को चिंता बिल्कुल नहीं करनी चाहिए बल्कि आगे सफल होने के लिए प्रयासरत होना चाहिए।
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नगरा क्षेत्र के देवढिया निवासी व बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षा निदेशक के पद पर तैनात रमेश यादव के बड़े पुत्र सुनील यादव का उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग प्रयागराज द्वारा असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर चयन होने से घर परिवार सहित गांव में हर्ष है। वर्तमान में सुनील यादव 2019 की यूपी पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण कर मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुटे हैं। सुनील बचपन से ही मेधावी छात्र रहे । छोटी बहन ममता यादव दिल्ली में सिविल जज तथा छोटा भाई अजय कुमार एनआईटी बंगलुरू से सिविल इंजीनियरिंग कर रहा है। सुनील ने 1999 में हाईस्कूल में 65 व 2001 में इंटर में 61 फीसदी अंक हासिल किया था। लेकिन पढ़ाई व तैयारी बूते आज सफलता हासिल की। सुनील ने कहा कि विभिन्न नौकरियों में मेरिट प्रणाली होने के कारण ही अंक को लेकर होड़ मचती है, सरकार को चाहिए कि सभी नौकरियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं कराए ताकि अंक की होड़ खत्म हो।
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बांसडीह ब्लॉक के जैदोपुर मठिया निवासी सुशील कुमार यादव वर्ष 2015 से ही सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 1998 में हाईस्कूल में 59.5 और2000 में इंटर में 76 फीसदी अंक मिला था। लेकिन मैं निराश नहीं हुआ और डिप्लोमा करने के बाद नौकरी के लिए तैयारी शुरू कर दी। बताया कि वर्ष 2008 में भर्ती निकली तो परीक्षा दी लेकिन इसका निस्तारण वर्ष 2015 में हुआ। कहा कि हाईस्कूल व इंटर में कम अंक मिलने से छात्रों को निराश नहीं होना चाहिए बल्कि लक्ष्य तय करके तैयारी करनी चाहिए।
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बांसडीह नगर पंचायत की अधिशासी अधिकारी सीमा राय ने कहा कि वर्ष 2000 में हाईस्कूल में 59.5 और 2002 में इंटर में 58 फीसदी अंक मिला था लेकिन मैं निराश नहीं हुई और इसके बाद ग्रेजुएशन व बीएड की और वर्ष 2013 मे समीक्षा अधिकारी की नौकरी मिली। इसके बाद भी मैंने तैयारी जारी रखी और वर्ष 2015 में लोवर पीसीएस के जरिए ईओ के लिए चयन हुआ। कहा कि कम अंक कुछ मायने नहीं रखता अगर छात्र के अंदर कुछ करने का हौसला हो।
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बांसडीह ब्लॉक के जैदोपुर मठिया गांव निवासी गौरव यादव प्राइमरी स्कूल में अध्यापक हैं। कहा कि वर्ष 2005 में हाईस्कूल में 76 व वर्ष 2007 में इंटर में 77 फीसदी अंक मिला लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और लगातार तैयारी करता रहा और वर्ष 2016 में अध्यापक की नौकरी मिल गई। कहा कि कम अंक मिलने से छात्र की योग्यता कम नहीं होती है।
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श्रीनगर रेवती निवासी पंकज कुमार साह सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर हैं। कहा कि उन्हें वर्ष 2009 में हाईस्कूल में 62 और 2011 में इंटर में 58 फीसदी अंक मिला था। जबकि मेरे साथ के कई छात्रों ने हमसे काफी अधिक अंक हासिल किया। लेकिन मैं लगातार पढ़ाई के दम पर सुधार करता रहा फिर डिप्लोमा किया और वर्ष 2017 में सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी मिल गई।