बलिया। जिले में दो दशक से दो फीसदी की दर से जनसंख्या बढ़ रही है। जनसंख्या बढ़ने के साथ ही रोजी रोजगार के साथ नहीं बढ़े जिससे समस्या बढ़ गई है। जनपद में अपेक्षित उद्योग धंधे नहीं हैं। कृषि उद्योग पर भी संकट है। जनसंख्या नियंत्रण के लिए समय-समय पर अभियान तो चलाया जाता है लेकिन इसका धरातल पर असर नहीं दिखाई दे रहा हैै। जबकि इसके अनुपात में आवश्यक सुविधाओं में निरंतर कमी आई है।
आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2001 की जनगणना में जिले की कुल आबादी 27,52,412 थी, जो वर्ष 2011 में बढ़कर 32,39,774 हो गई। यही नहीं बीते नौ वर्षों में जिले की आबादी अपनी रफ्तार से गतिमान है। 2001 की जनगणना के अनुसार जिले की जनसंख्या में 14,09,866 पुरुष और 13,42,546 महिलाएं शामिल थी। कुल बच्चे (छह साल तक) 5,22,958 थे, जिसमें बालक 2,67,874 और 2,55,084 बालिकाएं थीं। उस वक्त कुल साक्षरता 13,45,122 (60.30), साक्षर पुरुष 8,55,481, साक्षर महिलाएं 4,89,461 थीं। पुरुष-महिला का लिंग अनुपात 1000: 952 का रहा। जनसंख्या का घनत्व 868 प्रति वर्ग किलोमीटर था। जबकि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या में 16,72,902 पुरुष और 15,66,872 महिलाएं थीं। कुल बच्चे (छह साल तक) 4,71,852 में बालक 2,48,293 और 2,23,559 बालिकाएं थीं। जिले की कुल साक्षरता 19,63,590 (70.94), साक्षर पुरुष 11,60,960, साक्षर महिलाएं 8,02,630 थीं। पुरुष-महिला का अनुपात 1000: 937 है। जनसंख्या का घनत्व 1,087 प्रति वर्ग किलोमीटर है।