रामगढ़। जिलाधिकारी एसपी शाही ने बुधवार को नौरंगा क्षेत्र में भ्रमण कर बाढ़ व कटान का जायजा लिया। उन्होंने नदी उस पार पचरुखिया दियारे से धारा मोड़ने के लिए किए गए खोदाई व ड्रेनेज कार्य को देखा। बाढ़ खंड के अधिकारियों से बचाव कार्य संबंधी जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
ड्रेजिंग कार्य के निरीक्षण के दौरान बताया गया कि यह प्रोजेक्ट 13 किलोमीटर का था, लेकिन समय से पहले पानी आ जाने की वजह से पहले चरण में 3650 मीटर लंबाई में ही काम कराया गया। इसमें भी 1900-2600 मीटर तक करीब 700 मीटर खोदाई का कार्य तो पूरा हो गया है, लेकिन ड्रेजिंग का कार्य नहीं हो सका। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि जैसे ही जलस्तर कम होता है इस कार्य को पूरा करा दिया जाए, अगले वर्ष का इंतजार नहीं करें। उन्होंने कहा कि पानी घटने के बाद अगर इसी वर्ष यह काम पूरा हो जाए तो अगली बाढ़ में काफी कारगर साबित होगा। मुख्य नदी में ड्रेजिंग का कार्य अक्तूबर से शुरू करके अगले वर्ष मई तक हर हाल में खत्म करने के निर्देश दिए। इस मौके पर एसडीएम सुरेश पाल, बाढ़ खण्ड के एक्सईएन संजय मिश्र, एसडीओ कमलेश कुमार आदि रहे।
ड्रेजिंग कार्य का नक्शा रिपोर्ट तीन दिनों में दें
रामगढ़। ड्रेजिंग कार्य के निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी ने बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता को निर्देश दिया कि अब तक हुए ड्रेजिंग कार्य का चैनलवार एलाइन्मेंट और यह किस-किस गांव के किस गाटा से गुजरा है, तीन दिनों के अंदर सर्वे करके रिपोर्ट दें। बताया कि सितंबर महीने में ही राजस्व विभाग के स्तर से इसका परीक्षण कराया जाएगा।
स्थानीय गोताखोरों को चार दिवसीय ट्रेनिंग देंगे एनडीआरएफ के जवान
रामगढ़। बाढ़ क्षेत्र के भ्रमण के दौरान जिलाधिकारी ने एनडीआरएफ के टीम लीडर अनिल शर्मा से जरूरी जानकारी ली। कहा, फिलहाल कहीं रेस्क्यू जैसी स्थिति नहीं है। ऐसे में खाली समय का सदुपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय गोताखोरों, मल्लाहों को ट्रेंड करने की पहल की जाए। इसके लिए सितम्बर महीने के चौथे सप्ताह में बकायदा चार दिवसीय आवासीय ट्रेनिंग आयोजित किया जाए। कम से कम 50 स्थानीय गोताखोर एनडीआरएफ के जवानों के माध्यम से ट्रेंड हो जाए। जिलाधिकारी ने कहा कि इमरजेंसी में स्थानीय गोताखोर हमेशा काम आते हैं। ऐसे में ये और ट्रेंड हो जाएंगे तो बेहतर रहेगा।
नौरंगा में लगाई चौपाल, योजनाओं का किया सत्यापन
रामगढ़। डीएम श्रीहरि प्रताप शाही ने बुधवार को गंगा उस पार के गांव नौरंगा में चौपाल लगाई। पूरे गांव में भ्रमण कर आवास व शौचालय योजना के तहत बने आवास व शौचालय का स्थलीय सत्यापन किया। राशन, पेंशन जैसी योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे बातचीत कर तथा ग्रामीणों से पूछकर आश्वस्त हुए कि पात्र को ही लाभ मिला है या नहीं।
गांव में पहुंचते ही जिलाधिकारी ने फेकू बाबा स्थान पर दर्शन किया। फिर वहां लोगों के बीच बैठकर गांव में हुए विकास कार्यों का सत्यापन करना शुरू किया। कार्डधारकों का नाम बोलना शुरू किया तो कुछ नाम पर लोगों ने आपत्ति किया कि जिनके पास वाहन आदि हैं उनका भी अंत्योदय सूची में नाम है। जिलाधिकारी ने डीएसओ को इसकी जांच कर रिपोर्ट देने को कहा।
आवास योजना के लाभार्थी भगवान प्रसाद के आवास को देखा कि पूरा हो गया है या नहीं। प्लास्टर व दरवाजा का काम बाकी था, जिसे करा लेने को कहा। उनका शौचालय देखा और उसका हमेशा उपयोग करने को प्रेरित किया। खंड विकास अधिकारी को निर्देश दिया कि पूरा धन भेज देने के बाद भी इस तरह अगर कोई आवास अधूरा है तो उसे पूरा कराएं। गांव में लगे वाटर फिल्टर भी शोपीस बने हुए हैं। जिलाधिकारी ने उसे भी देखा और जल निगम से जरूरी पूछताछ करने की बात कही। गांव में सौर ऊर्जा के माध्यम से लाइट और पंखे की व्यवस्था को भी जिलाधिकारी ने देखा।
दो घंटे में कटा दो एकड़ खेती योग्य भूमि
लालगंज। क्षेत्र के शिवपुर घाट पर मंगलवार की देर शाम गंगा नदी के किनारे कटान शुरू हो गया। करीब दो घंटे हुए कटान में दो एकड़ कृषि योग्य भूमि गंगा में समाहित हो गई। संबधित किसानों का कहना है कि यदि इस ओर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो हमलोग भूमिहीन होकर रह जाएंगे।
गंगा के घटते जलस्तर के बीच नदी के किनारे शिवपुर घाट के सामने मंगलवार की शाम अचानक कटान शुरु हो गया जो लगातार दो घंटे तक जारी रहा। कटान से टीका सेमरिया, बहुआरा व मुरारपट्टी मौजे के दो एकड़ से अधिक खेती योग्य भूमि पानी में समाहित हो गया। कटान की शुरुआत शिवपुर घाट से रात करीब नौ बजे शुरू हुआ और दो घंटे तक रहा। मुरारपट्टी के किसान मनोज तिवारी, सेमरिया के किसान अशोक तिवारी, माझिल तिवारी, हरेराम तिवारी, धनजी तिवारी आदि ने कहा कि सरकारें इस ओर ध्यान नहीं दे रही है और न ही गंगा नदी के कटान में नष्ट खेतों का कोई मुआवजा ही दे रही है। कहा कि यही स्थित रही और खेतों को कटान से बचाने के उपाय नहीं किए गए तो हम किसान भूमिहीन बनकर रह जाएंगे।