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धन व वैभव का पर्व धनतेरस पर नगर रहा गुलजार

Mon, 09 Nov 2015 09:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बलिया
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धनतेरस पर नगर सहित ग्रामीण इलाकों में जमकर खरीददारी हुई। देर रात तक बाजार गुलजार रहे। बाजार में सोने-चांदी के गहने, फूल, पीतल, स्टील आदि के बर्तन, वाहन, जमीन आदि की भी खरीददारी की।
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जनपद के छोटे और बड़े बाजारों में बड़ी संख्या में लोग अपने परिवार के साथ खरीददारी करने में जुटे रहे। सबसे अधिक भीड़ बर्तन और सोने-चांदी की दूकानों पर देखने को मिली।

देर शाम तक बर्तन की दुकानों से जहां करीब 1 करोड़ से अधिक के बर्तन बिक चुके थे, वहीं दो करोड़ से अधिक सोने-चांदी के आभूषणों की बिक्री बताई जा रही थी। धनतेरस पर्व के मद्देनजर सर्वाधिक आभूषण और स्टील के बर्तनों की दूकान पर महिलाओं की भीड़ देखने को मिली।
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पूंजीपति जहां सोने-चांदी की दूकानों पर जाकर लाखों रुपये के आभूषण खरीदे, वहीं मध्यमवर्गीय परिवार के लोग चांदी के सिक्के, चांदी की नोट, हल्के सोने के आभूषण आदि की खरीददारी की। बर्तन की दूकानों पर इस बार भी इंडक्शन के चूल्हे, इंडक्शन के बर्तन के साथ ही पूजा की थालियां अधिक की भी बिक्री तेज रही।


बर्तन के दूकानों पर सुबह से ही भीड़ लगी रही। आलम यह रहा कि बर्तन के बड़े दूकानदारों ने देर शाम तक जहां डेढ़ से दो लाख रुपये तक की बिक्री किए, वहीं छोटे दूकानदार भी 25 से 50 हजार तक का बर्तन बेचने से पीछे नहीं रहे। बर्तन विक्रेता राजेश जायसवाल ने बताया कि बर्तनों पर मंहगाई का असर भले रहा है।

लेकिन धनतेरस के पर्व पर हर कोई अपने सामर्थ्य के अनुसार बर्तन खरीदना चाहता है। उधर लोग चांदी के सिक्के के साथ ही लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा, चांदी की पान-सुपारी को भी खरीदना शुभ बताया।

 बहुतों ने एक साथ पांच धातुओं का खरीदने का काम किया। रतनपारखी घनश्याम दास जौहरी की माने तो धनतेरस के पर्व पर लोग चांदी के पुराने सिक्के  की अधिक डिमांड रही वहीं सोने के हल्के जेवरों की खरीददारी हुई।
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