कूड़ा संग्रह के लिए लाखों की लागत से खरीदे गए वाहन शोपीस बन गए हैं। आलम ये है कि जनता शिकायत करती है कि कूड़ा वाहन नहीं आ रहा और अधिकारी कान में तेज डालकर सो रहे हैं। आलम ये है कि नाली निकासी की व्यवस्था आज तक सुचारू नहीं हो सकी लिहाजा सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्वच्छ भारत निशन के तहत गांव में भी कूड़ा उठाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए लाखों की लागत से कूड़ा संग्रह के लिए ई-रिक्शा और अन्य सामग्री उपलब्ध कराई गई है, लेकिन धरातल पर ई रिक्शा और कूड़ा संग्रह गाड़ी शोपीस बनी हुई है। इसका प्रयोग कूड़ा उठान में नहीं किया जा रहा है।
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कुछ स्थानों पर इससे माल ढुलाई का कार्य किया जा रहा है। पंदह ब्लॉक की लगभग सभी गांवों की यही स्थिति है। कूड़ा न उठाने के कारण कूड़ा हर तरफ फैला हुआ है। संचारी रोग अभियान चल रहा है और संक्रामक बीमारी फैलने की आशंका बनी हुई है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव में सफाई को लेकर कूड़ा संग्रह गाड़ी, ठेला गाड़ी, डस्टबीन और जहां नाली का निकास नहीं है वहां सोख्ता बनवाया जाता है। धन का आवंटन गांव की आबादी के अनुसार होता है। सरकार की मंशा है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को स्वच्छ किया जाए।