परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक सत्र 2022-23 में पंजीकृत नौनिहालों को नई पाठ्य पुस्तकों के लिए अभी इंतजार करना पड़ेगा। अप्रैल से शुरू हुए शैक्षिक सत्र में नौनिहाल पुरानी पाठ्य पुस्तकों से पढ़ाई कर रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार नई पाठ्य पुस्तकें सितंबर से पहले नहीं आएंगी।
कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों को शिक्षित करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जिले में 1598 प्राथमिक, 259 उच्च प्राथमिक स्कूल, 392 कंपोजिट स्कूल और 92 एडेड विद्यालय संचालित किए जाते हैं। मौजूदा समय में जिले के 2249 परिषदीय विद्यालयों में 3,40,750 नौनिहाल शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। नौनिहालों को सुविधाजनक शिक्षा देने के लिए विभाग की कोशिश जिले में फ्लॉप साबित हो रही है। एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू होने के बाद ग्रीष्मकालीन अवकाश तक बच्चों को पाठ्य पुस्तकें नहीं मिलीं। ग्रीष्मकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद 16 जून से पढ़ाई शुरू हुई तो भी नौनिहालों को पाठ्य पुस्तकें नहीं मिल सकी हैं। ऐसे में बच्चे पुराने बच्चों की फटी-पुरानी किताबें लेकर काम चला रहे हैं। कई स्कूलों में पंजीकृत बच्चों के पास पुरानी पुस्तकें भी नहीं हैं। इसके चलते गुणवत्तापरक ढंग से शिक्षा का दावा झूठा साबित हो रहा है।
अभी सिर्फ टेंडर हुआ
राज्य स्तर पर इस संबंध में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिला स्तर से नामित संस्था को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया है। वर्क ऑर्डर जारी होने के 90 दिन के भीतर पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति मिलने की संभावना है। ऐसे में फिलहाल जल्दी पाठ्य पुस्तकें मिलने के आसार नहीं हैं।
आपूर्ति मिलने के बाद होगी जांच
जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता सौरभ गुप्ता ने बताया कि पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति मिलने के बाद जिला स्तरीय कमेटी से गुणवत्ता का परीक्षण कराया जाएगा। परीक्षण में मानक के अनुसार प्रकाशन, पन्ने व पाठ्य सामग्री होने के बाद स्कूलों में वितरित किया जाएगा। सभी प्राथमिक स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम की एक-एक किताब नमूने के रूप में पहुंचाई जाएंगी और मॉडल प्राथमिक स्कूल व मॉडल उच्च प्राथमिक स्कूल में अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकों का वितरण नियमानुसार किया जाएगा।
जल्द आपूर्ति की उम्मीद
बीएसए शिवनारायन सिंह ने बताया कि नामित संस्था को वर्क ऑर्डर दिया जा चुका है। जल्द ही पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति मिलने की संभावना है। आपूर्ति मिलते ही बच्चों में पाठ्य पुस्तकें वितरित की जाएंगी। पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए पुराने बच्चों की पाठ्य पुस्तक संग्रहीत कर वितरित की गई हैं। पाठ्य पुस्तक के अभाव में पढ़ाई प्रभावित न हो इसकी जिम्मेदारी संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक को दी गई है।