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जागा विभाग, दो दिनों में वसूले 42 हजार

Tue, 13 Jun 2017 10:20 PM IST
ballia
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अवैध वसूली मामला
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प्रांतीय सीमावर्ती क्षेत्र भरौली में पुल बंद होने की आड़ में पिछले तीन सालों से चल रहे ‘खेल’ का आखिरकार खुलासा हो ही गया। अमर उजाला के लगातार खबरें प्रकाशित करने तथा मंत्री की फटकार के बाद विभाग जागा और दो दिनों में केवल लाल बालू लेकर आने वाले वाहनों से 42 हजार की वसूली की। इसकी पुष्टि फेफना रेंजर ने भी की है।
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वन विभाग की ओर से वर्ष 2007-08 में हाईकोर्ट के निर्देश पर वन उपज से अभिवहन शुल्क वसूलने प्रांतीय सीमाओं पर चेकपोस्ट स्थापित किया गया। हालांकि वर्ष 2012 में वैट लागू होने के बाद सरकार ने सभी विभागों के चेकपोस्ट को समाप्त कर दिया।

इसके बाद वन विभाग की ओर से प्रवर्तन दल की तैनाती सभी प्रांतीय सीमाओं पर की गई और बिहार की ओर से आने वाले लाल बालू, कोयला, गिट्टी आदि पर अभिवहन शुल्क वसूल करने का काम जारी रहा। हालांकि इस दौरान भी वन विभाग के कर्मचारियों ने वाहनों की संख्या कम दिखाकर खूब ‘खेल’ किया और करोड़ों के गोलमाल की बात सामने पर वर्ष 2013 में एडीएम ने जांच भी शुरु की लेकिन यह ठंडे बस्ते में पड़ गया।
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इसी बीच भरौली-बक्सर के बीच बना गंगा पुल को मरम्मत के लिए बिहार सरकार ने 12 मई 2014 को आधी रात में पुल के दोनों सिरे पर लोहे की बैरिकेडिंग लगाकर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर दिया। लेकिन लाल बालू का आवागमन नहीं रुका और छोटे वाहनों से लाल बालू की तस्करी जारी रही।

लेकिन पुल बंद होने की आड़ में वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों ने राजस्व वसूली बंद कर दिया लेकिन मौके पर वाहनों से वसूली जारी रही और तीन सालों तक यह गोरखधंधा जारी रहा। ‘अमर उजाला’ ने लगातार इसका खुलासा किया और इसी बीच क्षेत्र में पहुंचे राज्यमंत्री उपेन्द्र तिवारी ने वन विभाग के अफसरों को फटकार लगाई।

इसके बाद विभाग जागा और रेंजर समेत तीन कर्मियों को हटाने के साथ ही मोबाइल टीम की तैनाती कर लाल बालू से वाहनों से राजस्व की वसूली शुुरु कराई। फेफना रेंज के रेंजर की मानें तो दो दिनों में 42 हजार की वसूली की गई है।

दो दिनों में हुई राजस्व वसूली को लेकर उठ रहे सवाल
बलिया। प्रांतीय सीमा नरहीं थाना क्षेत्र के भरौली स्थित जिस गंगा पुल को वन विभाग पिछले तीन सालों से बंद दिखाते हुए वन उपज नहीं आने की बात कर रहा था, खुलासा के बाद उसकी पूरी कलई ही खुल गई। अब तो यह भी तय हो गया है कि बिहार प्रांत से लाल बालू की आवक नहीं रुक रही है।

विभाग की ओर से दो दिनों की वसूली 42 हजार को ही मानें तो प्रति वर्ष 73 लाख होता है तो सवाल उठता है कि तीन सालों से राजस्व वसूली क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों की मानें तो वनकर्मी की ओर से वसूली की गई तो उसे राजस्व खजाने में जमा क्यों नहीं किया गया?

तीन सालों में किए गए करोड़ों के गोलमाल के लिए आखिर जिम्मेदार कौन? हालांकि सूत्रों की मानें तो अभी भी इसमें गड़बड़झाला किया जा रहा है जिसके चलते राजस्व कम हो रहा है। इस मामले की जांच हो तो करोड़ों के गोलमाल में कई अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है।


पिछले दो दिनों से भरौली सीमा पर मोबाइल टीम को तैनात किया गया है और बिहार की ओर से आने वाले वन उपज पर अभिवहन शुल्क वसूलने का निर्देश दिया गया है। दो दिनों में करीब 42 हजार की वसूली की गई है।- पीएन राय, रेंजर, फेफना रेंज, बलिया
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